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तीसरा मोरचा बनाने की कवायद को झटका, शरद ने कहा, यह व्‍यावहारिक नहीं, मुमकिन नहीं

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Mumbai  :  2019 लोकसभा चुनाव को लेकर विपक्ष द्वारा तीसरा मोरचा बनाने की कवायद को करारा झटका लगा है. बता दें कि एनसीपी के अध्‍यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार ने कहा है कि तीसरा मोर्चा व्‍यावहारिक नहीं है, इसलिए यह मुमकिन नहीं हो पायेगा. पवार के बयान से पूर्व प्रधानमंत्री और जेडीएस नेता एचडी देवगौड़ा द्वारा जल्‍द से जल्‍द तीसरे मोर्चे के गठन की मांग पर सवाल खड़ा हो गया है. शरदपवार ने चैनल टाइम्‍स नाउ से कहा कि तीसरे मोर्चे के रूप में विभिन्‍न दलों का महागठबंधन अव्‍यवहारिक है; इस क्रम में कहा कि उनके कई साथी चाहते हैं कि महागठबंधन बनाया जाये. प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर किसी का नाम नहीं लेते हुए शरद पवार ने संकेत दिया कि जिस तरह से 1977 में मोरारजी देसाई चुनाव के बाद पीएम चुने गये थे,  उसी तरह किया जा सकता है.
कहा कि निजी तौर पर वे महसूस करते हैं कि वर्तमान में वर्ष 1977 जैसा माहौल है.  आपातकाल के समय इंदिरा गांधी के सामने कोई राजनीतिक दल नहीं था, लेकिन कश्‍मीर से लेकर कन्‍याकुमारी तक जनता नेउनके खिलाफ वोट किया और कांग्रेस को हराया.

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मैं महसूस करता हूं कि महागठबंधन या तीसरा मोर्चा संभव नहीं है       

जनता ने इंदिरा जी को भी हरा दिया;  जनता पार्टी का गठन किया गया. चुनाव के बाद एक नेता के रूप में मोरार जी देसाई का चुनाव किया गया. लेकिन चुनाव से पूर्व  मोरार जी देसाई को विकल्‍प के तौर पेश नहीं किया गया था; कहा कि  इसलिए शरद पवार या कोई और आज की तारीख में किसी को पीएम पद के चेहरे के रूप में पेश करने का कोई सवाल नहीं है.  तीसरे मोर्चे को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में शरद पवार ने कहा, कि ईमानदारी से कहूं तो मैं महसूस करता हूं कि महागठबंधन या तीसरा मोर्चा संभव नहीं है;  मेरा अपना आंकलन है कि यह व्‍यवहारिक नहीं है. बता दें कि देवगौड़ा ने दो दिन पूर्व कहा था कि जल्‍द ही तीसरे मोर्चे का गठन होना चाहिए क्‍योंकि पीएम मोदी और अमित शाह ने अप्रैल की बजाय मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान और छत्‍तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव के साथ दिसंबर में लोकसभा चुनाव कराने के संकेत दिये हैं. यह भी कहा था कि कांग्रेस क्षेत्रीय दलों को हल्‍के में न ले. जरूरी नहीं है कि क्षेत्रीय दल हर जगह कांग्रेस के साथ मोदी के खिलाफ आगामी लोकसभा चुनाव लड़े.

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