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जगन्नाथ मंदिर में गैर-हिन्दुओं को भी अंदर जाने देने पर विचार करे मंदिर प्रबंधन :  सुप्रीम कोर्ट

NewDelhi : सुप्रीम कोर्ट ने पुरी के जगन्नाथ मंदिर के संदर्भ में एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए ओडिशा सरकार से कहा है कि वह सुनिश्चित करे कि श्रद्धालुओं के साथ मंदिर में किसी तरह की जबरदस्ती न हो. सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका की सुनवाई जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर की बेंच ने की. बता दें कि जनहित याचिका में मंदिर के अंदर पंडों की मनमानी का भी मुद्दा उठाया गया था. इस क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिला जज ने मंदिर प्रबंधन में सुधार के लिए जो सिफ़ारिशें की हैं, उन्हें लागू किया जाये.

बड़ी संख्या में विदेशी इस मंदिर को देखने पुरी आते हैं

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर ज़िला जज की रिपोर्ट पर प्रदेश सरकार को कोई आपत्ति है तो अपनी आपत्ति दर्ज कराये. खबरों के अनुसार कोर्ट के संज्ञान में यह बात आयी थी कि बड़ी संख्या में विदेशी इस मंदिर को देखने पुरी आते हैं, लेकिन गैैर-हिन्दू होने कारण उन्हें अंदर नहीं आने दिया जाता.  सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर प्रबंधन से ग़ैर-हिन्दुओं को भी मंदिर के अंदर जाने देने पर विचार करने को कहा.  अदालत ने साफ़ किया कि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावों पर पंडों का कोई अधिकार नहीं है.

 

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बता दें कि ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित लेखिका प्रतिभा राय कई सालों से पंडों की मनमानी के ख़िलाफ आवाज उठाती रही हैं. प्रतिभा खुद भी पंडों की मनमानी और हमले का शिकार हो चुकी हैं. जान लें कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और उनकी पत्नी सविता कोविंद के साथ 18 मार्च को प्रभु जगन्नाथ के दर्शन के दौरान सेवायतों द्वारा दुर्व्यवहार किये जाने का मामला अखबारों में आ चुका है.

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