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बेटियों को पढ़ाने का देते हैं नारा और कर रहे हैं स्कूल बंद, कैसे पढ़ेंगी बेटियां : सुनीता सिंह

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Ranchi : झारखंड एक ऐसा राज्य बन गया है, जहां पलायन, बेरोजगारी, भुखमरी और कुपोषण अधिक है. ऐसे में समग्र विकास की बात थोड़ी धूमिल दिखाई पड़ती है. शिक्षा का ही हाल राज्य में देख लें. सरकार बेटियों को पढ़ाने और आगे बढ़ाने का नारा देती है, लेकिन यहां बच्चे शिक्षित क्या होंगे, सरकार तो स्कूलों को ही बंद करने में लगी हुई है. ऐसे में बेटियां आगे कैसे बढ़ेंगी. उक्त बातें जेवीएम की केंद्रीय प्रवक्ता सुनीता सिंह ने कहीं. वह मंगलवार को बिरसा माइन्स मॉनिटरिंग सेंटर की ओर से आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं. कार्यक्रम का आयोजन एसडीसी सभागार में किया गया, जिसका विषय ‘निर्णायक इकाइयों में महिलाओं की बराबर भागीदारी’ था. सुनीता सिंह ने कहा कि राजनीति का हाल भी कुछ ऐसा ही है. किसी पार्टी विषेश नहीं, बल्कि पुरुष प्रधानता के कारण महिलाएं राजनीति में आगे नहीं आ पा रही हैं. जबकि, महिलाओं को उचित अवसर मिलने से महिलाएं बेहतर कर सकती हैं.

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एकजुट होकर आवाज उठायें

कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता आभा सिन्हा ने कहा कि राजनीति में महिलाएं सशक्त हों, इसके लिए जरूरी है कि महिलाएं पार्टी विशेष से ऊपर उठकर कार्य करें. महिलाओं को चाहिए कि राजनीतिक पार्टियों से अलग हटकर कार्य करें. एकजुटता के साथ आवाज उठाने से ही महिलाएं राजनीति में आगे बढ़ सकती हैं. उन्होंने कहा कि विधानसभा और लोकसभा में पार्टियों को चाहिए कि महिला उम्मीदवारों को भी बराबरी से टिकट दिया जाये. वहीं, ग्राम सभा से लेकर संसद तक 50 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं के लिए निर्धारित किया जाये.

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पुरुषों ने ही बनाये महिलाओं के लिए कानून

इस संबंध में सीपीआईएम की वीणा लिंडा ने कहा कि आज तक महिलाओं के हित में जितने भी कानून बने, सभी पुरुषों ने ही बनाये. कोई भी कानून महिलाओं ने बनाया. लेकिन, अब जरूरी है कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ायी जाये. पुरुषों ने अपने हितों को ध्यान में रखकर कानून बनाये हैं. ऐसे में जरूरी है कि महिला आरक्षण 50 प्रतिशत विधेयक को जल्द से जल्द पारित किया जाये.

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ये थे उपस्थित

मौके पर सपना सुरीन, कामना खलखो, लक्ष्मी कुमारी, फैजीन फातिमा, मार्था उरांव समेत अन्य लोग उपस्थित थे.

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