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ये जनाब जीतने के लिए नहीं हारने के लिए लड़ते हैं चुनाव, 93 बार हार चुके हैं, बनाना चाहते हैं हारने का शतक

कभी किसी चुनाव में एक रुपया खर्च नहीं किया

Agra : उत्तर प्रदेश में विधानसभा सभा चुनावों की तारीखों का ऐलान हो चुका है और पहले चरण के लिए नामांकन फॉर्म की बिक्री भी शुरू हो गई है. तो वहीं, जीत का सेहरा अपने-अपने सिर पर बांधने के लिए राजनेताओं ने भी अपनी कमर कस ली है.

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अधिकतर प्रत्याशी जीतने के लिए चुनाव लड़ते हैं लेकिन हम आपको आज एक ऐसे प्रत्याशी के बारे में बताने जा रहा है, जो केवल चुनाव हारने के लिए मैदान में उतरता है. जी हां…आपने सही सुना और इस बात को सुनने के बाद आपको हैरानी भी होगी. लेकिन इस प्रत्याशी की हसरत चुनावी मैदान में हारने का शतक बनाने की है.

जी हां..हम बात कर रहे है 75 वर्षीय हस्नूराम आंबेडकरी की. हस्नूराम आंबेडकरी अब तक 93 बार चुनाव लड़ चुके है और वो शुक्रवार को 94वीं बार चुनाव लड़ने के लिए पर्चा खरीदने कलेक्ट्रेट पहुंचे. हस्नूराम आंबेडकरी, आगरा जिले के गांव नगला दूल्हे के रहने वाले है. हस्नूराम आंबेडकरी ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि वो सन् 1985 से अलग-अलग 93 चुनाव लड़ चुके हैं.

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लोग इन्हें याद रखें इसलिए लड़ते हैं चुनाव

100 बार हारने का रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं. उन्होंने बताया कि मैंने कभी किसी चुनाव में एक रुपया खर्च नहीं किया. कहा कि एक बार राष्ट्रपति पद के लिए भी नामांकन किया था, लेकिन पर्चा निरस्त हो गया था. चुनाव लड़ने के पीछे हस्नूराम आंबेडकरी ने कहा कि हारने के लिए वो चुनाव इसलिए लड़ते है ताकि लोग उन्हें याद रख सके.

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सरकारी अमीन थे हस्नूराम

हस्नूराम ने बताया कि वह तहसील में 1984 में सरकारी अमीन थे. तभी चुनाव लड़ने की इच्छा हुई तो एक पार्टी से टिकट मांगा. टिकट देने की बजाय उन्होंने मेरा मजाक उड़ाया, कहां तुम्हें तो तुम्हारे घर में कोई वोट नहीं देगा. तभी से हस्नूराम को चुनाव लड़ने की धुन सवार हो गई. तभी से वह विभिन्न पदों पर 93 बार चुनाव लड़ चुनाव चुके हैं.

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नौ सीटों पर कुल 37 पर्चे बिके

आगरा जिले की नौ सीटों के लिए पहली बार एक ही स्थल कलेक्ट्रेट में पर्चे भरे जा रहे हैं. शुक्रवार सुबह आठ बजे ही कलेक्ट्रेट परिसर में छावनी में तब्दील हो गया. गेट पर भारी पुलिस बल तैनात रहा. प्रत्येक व्यक्ति को जांच के बाद परिसर में प्रवेश मिला. पहले दिन नौ सीटों पर कुल 37 पर्चे बिके हैं. जिनमें 18 निर्दलीय एवं 19 राजनीतिक दलों के लोगों ने लिए हैं. हालांकि पहले दिन किसी प्रत्याशी द्वारा पर्चा नहीं भरने के कारण नामांकन का खाता भी नहीं खुला है.

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