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झारखंड में वन रेंज अफसरों का टोटा,कैसे होगा काम

Ranchi: झारखंड में वन रेंज अफसरों का टोटा है. यहां लगभग 100 रेंज ऐसे हैं जहां रेंज अफसर हैं ही नहीं. केवल प्रभार में ही काम चल रहा है. कई जिलों में एसीएफ को रेंज अफसर का प्रभार दे दिया गया है. रेंजरों के नहीं रहने से विकास कार्य बाधित है. वन विभाग में रेंज अफसरों का 385 पद सृजित है. जबकि 150 पद पर ही रेंज अफसर कार्यरत हैं.

 

यहां खाली हैं रेंज अफसरों के पद

वाइल्ड लाइफ सेंचुरी,बिल्डिंग रेंज, पालकोट वाइल्ड लाइफ सेंचूरी, मृग बिहार काला माटी, अनुसंधान केंद्र गड़खटंगा, सोशल फॉरेस्ट्री के तीन रेंज- खूंटी,लोहरदगा व तमाड़ आदि शामिल है.

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रेंज अफसरों की भूमिका

रेंज अफसर की भूमिका किसी भी क्षेत्र में पर्यावरण, वन्य व्यवस्था, हरित संरक्षण के संदर्भ में बहुत महत्वपूर्ण होती है. फारेस्ट ऑफिसर को सुनिश्चित करना होता है कि तैनाती के क्षेत्र में केंद्र या राज्य सरकार के मानकों एवं नियमों के अनुरूप वनीय व्यवस्था का संरक्षण स्थानीय प्रशासन की मदद से करें.

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विधायक अंबा प्रसाद ने सदन में उठाया था मामला

कांग्रेस विधायक अंबा प्रसाद ने रेंज अफसरों के रिक्त पदों का मामला सदन में उठाया था. उन्होंने विभाग से पूछा था कि रेंज अफसर की बहाली नहीं होने से कार्यरत रेंजरों को तीन-चार रेंज का प्रभार सौंप दिया गया है. विभाग ने भी माना कि विभाग में कई संवर्गों में रिक्तियां हैं. आनेवाले दिनों में कई अधिकारी सेवानिवृत हो रहे हैं.

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