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जमीन अधिग्रहण मुद्दे पर विधानसभा सत्र में दो दिनों की विशेष बहस हो : सुदेश महतो

सत्ता-विपक्ष को नैतिक जिम्मेदारी के साथ विशेष बहस के लिए आगे आना चाहिए, जमीन अधिग्रहण जैसे संवेदनशील विषय पर बहस ना होना चिंतनीय है

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‘सत्र का बहिष्कार एवं सदन को नहीं चलने देना मुद्दे पर बहस से भागना इस मुद्दे पर गंभीर नहीं होने को दर्शाता है’

Ranchi : आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सह राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश कुमार महतो ने कहा है कि जमीन अधिग्रहण के सवाल पर मानसून सत्र में इस मुद्दे पर दो दिनों का विशेष बहस हो जहां सभी दलों के प्रतिनिधि अपनी बातों को खुलकर सदन में रखें.
विधानसभा राज्य की सबसे बड़ी पंचायत है और जनता के निर्वाचित जन प्रतिनिधियों की सदन के प्रति अहम जिम्मेदारी होती है. इसलिए सत्ता-विपक्ष को नैतिक जिम्मेदारी के साथ विशेष बहस के लिए आगे आना चाहिए.आरोप-प्रत्यारोप की जगह मामले की गंभीरता को समझे पक्ष और विपक्ष

आरोप-प्रत्यारोप लगाने के बजाय सत्ता-विपक्ष विधानसभा के सभी राजनैतिक दलों और जन प्रतिनिधियों की ज़िम्मेवारी है कि वो राज्य के भोले-भाले आदिवासियों/मूलवासियो को गुमराह करने के बजाय उनके हित में उनकी मनोभावना के अनुकूल निर्णय लें. ज़मीन अधिग्रहण जैसे संवेदनशील विषय पर बहस ना होना चिंतनीय है. 3 मिनट में इतने गम्भीर विषय का पारित हो जाना जनता की भावना के विपरीत है. विधानसभा में पिछले कई सत्र में गतिरोध के कारण कार्यवाही ठप रही.

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विधानसभा सत्र का बहिष्कार और हंगामा दुःखद
विपक्ष द्वारा विधानसभा सत्र का बहिष्कार एवं सदन को नहीं चलने देना मुद्दे पर बहस से भागना इस मुद्दे पर गंभीर नहीं होने को दर्शाता है.
सुदेश महतो ने कहा है कि इससे पहले भी सीएनटी-एसपीटी में संशोधन की सरकार की कोशिशों को लेकर राज्य ने लंबे समय तक असमंजस की स्थिति का सामना किया है. ये परिस्थतियां सिर्फ इसलिए पैदा होतीं रही है कि जनभावना का ख्याल नहीं किया जाता. हालांकि सीएनटी-एसपीटी के मुद्दे पर सरकार को बैकफुट पर जाना पड़ा, लेकिन पूरा राज्य इसमें उलझा रहा. इससे राज्य में विकास और समरसता का माहौल भी प्रभावित होता रहा है. यह विषय झारखण्ड आंदोलन की मूल विषयों से जुड़ा है और गंभीर एवं संवेदनशील है.

भूमि अधिग्रहण पर सार्थक बहस की जरुरत

विधानसभा में विशेष बहस होने पर सरकार की तरफ से स्पष्ट बातें सामने आ सकेगी कि वह क्यों संशोधन करना चाहती है और इसके बिंदु क्या हैं. इससे राज्य का अहित होगा या विकास का मार्ग प्रशस्त होगा सदन में इस पर चर्चा होनी चाहिए. सुदेश महतो ने कहा है कि राजनीति में अड़ियल रवैये से सिर्फ राज्य की भोली भाली जनता का नुकसान हो रहा है. जाहिर है यह संवेदनशील मुद्दा है और इसके झरखंडी मानसिकता और मनोभावना के अनुकूल निदान भी आवश्यक है. वरना गुमराह करने और भरमाने की यह राजनीति झारखंड को बड़ा नुकसान पहुंचाएगी. और इसकी भरपाई कोई नहीं करेगा.

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जमीन अधिग्रहण के सवाल पर जनता के बीच भ्रम की स्थिति है. सड़कों पर और पार्टी के दफ्तरों से एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने के बजाय सत्ता-विपक्ष विधानसभा के मानसून सत्र में इस मुद्दे पर सभी दलों के प्रतिनिधि अपनी बातों को रखे.

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