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यहां पहाड़ी नाले पर बना गड्ढा ही है ग्रामीणों का सहारा, वह भी सूखनेवाला है

खूंटीः मार्च में पानी की किल्लत, मई-जून की स्थिति की चिंता में डूबे लोग

Khunti : गर्मी की दस्तक के साथ ही खूंटी जिले में लोग पानी के लिए पानी-पानी हो रहे हैं. मुरहू प्रखंड अंतर्गत रूमुतकेल पंचायत के जहरबेड़ा गांव में भोर होते ही महिलाएं बाल्टी-बर्तन लेकर गांव से दूर जंगलों के बीच स्थित पहाड़ी नाले के किनारे बने गड्ढे से पानी लेने पहुंच जातीं हैं. जहरबेड़ा की आंगनबाड़ी सेविका बेनेदिक्ता कहती हैं कि अभी तो पानी मिल रहा है, लेकिन परेशानी मार्च के बाद शुरू होगी, जब गड्ढे में थोड़ा सा पानी बच जायेगा.

वह बताती हैं कि अप्रैल महीने से इस गड्ढ़े के पास महिलाएं कतारबद्ध होतीं हैं. कटोरी से पानी निकाल कर बर्तन भरतीं हैं. एक-एक कर महिलाएं पानी लेती हैं. एक महिला अपनी समस्या बताते हुए कहती हैं कि कुल दो ऐसे गड्ढे हैं, जिनमें से एक मार्च के बाद सूख जायेगा. यहां मवेशियों के पानी पीने के लिए भी ग्रामीणों ने उसी बरसाती नाले पर एक गड्ढा बना रखा है.

जहरबेड़ा गांव के कई टोले हैं जो अलग-अलग पहाड़ों पर बसते हैं. राजस्व ग्राम जहरबेड़ा और इसके टोलों में कुल 40 आदिवासी परिवार रहते हैं. इस गांव में दो चापानल लगाये गये हैं और दोनों से पानी निकलना बंद हो गया है. जहरबेड़ा गांव का पहाड़ी नाला सूख चुका है. इस नाले पर दशकों पूर्व जंगली पत्थरों से पाटकर चार बांध बनाये गये थे, लेकिन उन बांधों में अब मिट्टी भर चुका है.

चकोम्दा गांव में एक तालाब ही है सहारा

इसी प्रखंड के बिंदा पंचायत अंतर्गत चकोम्दा गांव में नहाने-धोने के लिए मात्र एक तालाब सहारा बचा है. ग्रामीणों ने यहां महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग शिफ्ट बना रखा है. सुबह से 11 बजे तक महिलाएं, 11 से दो बजे तक पुरुष, तीन से चार बजे तक महिलाएं और चार बजे के बाद पुरुषों को तालाब में नहाने-धोने के लिए जाने की इजाजत है.

पांच चापानल लगे हैं पर पानी एक से भी नहीं निकलता

चकोम्दा में कुल छह बोरिंग हुई, पांच में चापानल लगाया गया है. लेकिन एक भी चापानल से पानी नहीं निकलता. एक बोरिंग है, जिसमें सोलर पंप लगा हुआ है. इसी का पानी लोगों की प्यास बुझा रहा है. लेकिन कभी-कभी जब पानी खत्म हो जाता है, तो समस्याएं बढ़ जाती हैं. मार्च के पहले सप्ताह में ही जिले में पानी बड़ी समस्या बन गयी है.

रूमुतकेल के पंचायत समिति सदस्य क्लेमेंट होरो कहते हैं कि इस वर्ष बरसात खत्म होने के बाद बारिश नहीं हुई, जिसके कारण रूमुतकेल पंचायत के गांव-टोलों में पानी की बड़ी समस्या होगी. वे मानते हैं पूर्व के दशकों में जंगलों की हुई अंधाधुंध कटाई भूगर्भीय जल स्तर के नीचे जाने का एक कारण है.

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