Opinion

छह साल से “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” का शोर है, फिर चीन से निकलने वाली कंपनियां भारत क्यों नहीं आ रही

Surjit Singh

पिछले छह-सात सालों से भारत में एक शोर है. जिसका नाम है “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस”. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ही नहीं भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी इस “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” की बात बड़े गर्व से करते रहे हैं. बताते रहे हैं कि कैसे हमने कितनी लंबी छलांग लगा ली. देश में नंबर-वन, नंबर-टू हो गये, तो दुनिया में हमारे “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” की तारीफ की जा रही है. पर, क्या यही सच है. शायद नहीं.

कोरोना संकट के बाद वैश्विक स्तर पर जो स्थिति उत्पन्न हुई है, उसने भाजपा की “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” के शोर और चकाचौंध को खोखला साबित कर दिया है. कोरोना के बाद चीन में कंपनियों के लिए हालात खराब हुए हैं. मजदूरी की लागत बढ़ी है और सरकार का हस्तक्षेप भी. ऐसी स्थिति में कंपनियां वहां से बाहर निकल रही हैं. पर, वह भारत की तरफ रुख नहीं कर रही. उनकी मंजिल ताईवान, वियतनाम जैसे देश हैं.

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रेटिंग कंपनी नेमुरा ने एक रिपोर्ट जारी की है. जिसके मुताबिक, चीन से बाहर निकलने वाली कंपनियों के लिए भारत आकर्षण का केंद्र नहीं है. कोरोना संकट के बाद से अभी तक चीन से कुल 56 कंपनियों ने अपना प्रोडक्शन प्लांट हटा लिया है.

इनमें से सिर्फ तीन कंपनियों ने ही भारत में प्रोडक्शन शुरु करने की बात की है. शेष 55 में से 26 कंपनियां वियतनाम चली गयी, 11 कंपनियां ताईवान और 8 कंपनियों ने थाईलैंड में प्रोडक्शन शुरु करने का फैसला लिया है.

वैसे तो भारत में कंपनियों के सामने कई समस्याएं आती रही हैं, लेकिन उनमें सबसे बड़ी समस्या जमीन की उपलब्धता, नौकरशाह, लंबी प्रक्रिया, माफिया, स्थानीय ट्रेड यूनियन, लेबर कानून आदि प्रमुख हैं.

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अगर समय रहते भारत सरकार इन मुद्दों पर सही रुख अपनाती है, तो कोरोना संकट के बाद की आर्थिक हालात से निपटना आसान होगा. पर, इसके लिए विपक्षी पार्टियों समेत किसान, मजदूर संगठनों को विश्वास में लेना सबसे जरुरी है.

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कंपनियों का भारत कम दिलचस्पी होना, रोजगार की दृष्टि से बहुत बुरी खबर है. भारत में पहले से ही बेरोजगारी दर पिछले 45 सालों से अधिक है. कोरोना संकट के बाद बेरोजगारों की संख्या में करोड़ों लोगों की बढ़ोतरी दर्ज हुई है. ऐसे में भारत सरकार के लिए जमीन पर काम करके ऐसे हालात बनाने होंगे, जिससे कंपनियों को विश्वास हो कि यहां प्रोडक्शन चालू करना फायदेमंद होगा.

इसके लिए जरुरी है कि ब्रांडिंग इवेंट के कार्यक्रमों की जगह जमीनी स्तर पर काम हो. साथ ही देश में सौहार्द वाला वातावरण हो. कोई भी कंपनी वैसी जगहों पर निवेश करने से मना कर देगी, जहां जाति, धर्म, सांप्रदाय के नाम पर तनाव का माहौल हो. अगर भारत सरकार को बेरोजगारी दूर करनी है, तो इसके लिए सही माहौल बनाना जरुरी है.

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