JamshedpurJharkhand

झारखंड में नहीं है जीनोम सीक्वेंसिंग की व्यवस्था, ऐसे में कैसे पकड़ में आयेगा ओमिक्रॉन!

Pratik Piyush

Advt

Jamshedpur : कोरोनावायरस के नये स्ट्रेन ओमिक्रॉन को लेकर पूरी दुनिया में अलर्ट है. पूर्वी सिंहभूम जिले में में भी.इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है और विदेश से आने वालों का डाटा इकट्ठा किया जा रहा है. लेकिन कोरोनावायरस के किसी भी नये वेरिएंट की पहचान करने के लिए जीनोम सीक्वेंसिंग की आवश्यकता पड़ती है. जमशेदपुर में टाटा स्टील, टाटा मोटर्स तथा अन्य बड़ी कंपनियां स्थित होने के कारण यहां विदेशी खूब आते हैं. यहां के कई लोग विदेशों में काम करते हैं. वे भी आते-जाते हैं. लेकिन जीनोम सीक्वेंसिंग सुविधा जमशेदपुर तो क्या, झारखंड में ही नहीं. यहां पर सैंपल जांच के नतीजे आने में भी काफी समय लगता है. ऐसी हालत में नये वेरिएंट के फैलने का खतरा ज्यादा है.

1 साल की बच्ची की कोरोना से मौत के बाद मचा है हड़कंप  

शहर अभी तक 18 लाख 53 हजार 920 लोगों के सैंपल टेस्ट किये जा चुके हैं. इनमें 52 हजार 134 संक्रमितों की पहचान की जा चुकी है. 51 हजार 39 लोग स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं. साथ ही 1062 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. ऐसे में जिले में नये वेरिएंट की जांच की व्यवस्था नहीं होना घातक सिद्ध हो सकता है. गुरुवार को बारीडीह के मर्सी अस्पताल में एक साल की कोरोना पीड़ित बच्ची की मौत से हड़कंप मच गया है. जिले में यह पहला मामला है जब इतनी कम उम्र के किसी बच्चे की मौत कोरोना के कारण हुई है.

रिपोर्ट आने तक संक्रमित के संपर्क में आये लोग होम क्वारंटीन

जिला सर्विलांस पदाधिकारी डॉ साहिर पॉल ने बताया कि जांच रिपोर्ट आने में थोड़ा समय लगता है. उस समय तक संदिग्ध मरीज को होम आइसोलेशन में रखने की व्यवस्था की गयी है. एसीएमओ ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति बाहर से आता है या कोई लक्षण दिखाई देते हैं, तो स्वास्थ्य विभाग को सूचना दें.

इनका अब भी करें पालन

  • मास्क का उपयोग करें
  • फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करें
  • हाथों को सेनेटाइज करते रहें
  • भीड़भाड़ वाले स्थान पर जाने से बचें

इन लक्षणों पर हो जायें सजग

  • फीवर, जुकाम खांसी होने पर हो जाएं सतर्क
  • फैमिली में एक से ज्यादा लोगों को दिक्कत है, तो कोरोना की
    संभावना ज्यादा
  • बुखार आने पर पैरासीटामोल लें, खुद को आइसोलेट करें
  • सांस लेने पर दिक्कत हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करे
  • अपनी ओर से जांच कराकर फैसला न करें

क्या है जीनोम सीक्वेंसिंग

जीनोम किसी जीव की  की कुंडली है. जीव कैसा होगा, कैसा दिखेग, यह सब कुछ उसके जींस तय करते हैं. इन्हीं जींस के विशाल समूह को जीनोम कहते हैं. किसी जीव के जीन के कोड को जानना ही जीनोम सीक्वेंसिंग है.

स्ट्रेन क्या है?

स्ट्रेन को आसान शब्दों में जेनेटिक वेरिएंट कह सकते हैं. यह सबकुछ वैसा ही है, जैसे एक ही कंपनी की कारें अलग-अलग वेरिएंट में आती हैं. एक ही मॉडल के अलग-अलग वेरिएंट की क्षमता और खासियतें अलग-अलग होती है.

भुवनेश्वर भेजे जा रहे सैंपल

कोरोनावायरस की जांच रियल टाइम पीसीआर मेथड से की जाती है. इसमें कोरोनावायरस के स्ट्रेन का पता नहीं चल सकता है. इसके लिए सैंपल का जीनोम सीक्वेंस निकालना होता है. जिले के सिविल सर्जन डॉ एके लाल ने कहा कि इस वक्त जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए हम भुवनेश्वर सैंपल भेज रहे है. इसमें थोड़ा वक्त लगता है.

जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए सैंपल भुवनेश्वर आईसीएमआर भेजने पड़ते हैं. इसकी रिपोर्ट आने में थोड़ा वक्त लगता है. ऐसे में नये स्ट्रेन के प्रसार को रोकने के लिए संक्रमित व्यक्ति अस्पताल में भर्ती करवाया जायेगा. साथ ही उसके संपर्क में आये लोगों को होम क्वारंटीन करने की व्यवस्था की गयी है.  -डॉ. साहिर पॉल, पूर्वी सिंहभूम जिला सर्विलांस पदाधिकारी

Advt

Related Articles

Back to top button