National

कोई भाषा थोपने की योजना नहीं हैः प्रकाश जावड़ेकर

New Delhi: दक्षिण भारतीय राज्यों में कथित तौर पर हिंदी भाषा थोपने को लेकर जारी विरोध पर जावड़ेकर ने कहा कि ऐसी कोई भी योजना नहीं है. नयी शिक्षा नीति के ड्राफ्ट को लेकर चल रहे विवाद पर सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने सफाई दी है. उन्होंने कहा कि हम देश की सभी भाषाओं को प्रमोट करना चाहते हैं. उन्होंने त्रिभाषा व्यवस्था को लेकर कहा कि अभी कमिटी ने इस पर प्रस्ताव ही तैयार किया है. इसे पब्लिक के फीडबैक के बाद सरकार की ओर से लागू करने का फैसला लिया जायेगा.

इसे भी पढ़ें – NEWS WING IMPACT: DC रांची ने बनायी पूर्व DGP डीके पांडेय की पत्नी की जमीन जांचने के लिए कमेटी, मंत्री ने कहा-कोई भी हो कानून से ऊपर नहीं

नयी शिक्षा नीति का ड्राफ्ट प्रकाश जावडे़कर के मानव संसाधन विकास मंत्री रहते हुए तैयार किया गया था. नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में मानव संसाधन विकास मंत्रालय का जिम्मा उत्तराखंड के पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक को सौंपा गया है. नयी एजुकेशन पॉलिसी का इंतजार करीब दो साल से हो रहा था और इसका ड्राफ्ट नये शिक्षा मंत्री को शुक्रवार को सौंपा गया था. पॉलिसी में सबसे ज्यादा फोकस भारतीय भाषाओं पर किया गया है. शिक्षा नीति के लागू होने से पहले ही तमिलनाडु में द्रविड़ मुनेत्र कझगम (डीएमके) के सांसदों ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि यदि हिंदी को थोपने का प्रयास किया तो फिर आंदोलन होगा.

इसे भी पढ़ें – भारत का स्पेशल ट्रेड स्टेटस वापस लेने का अमेरिकी सरकार का फैसला खतरे की घंटी : कांग्रेस

क्या है नयी शिक्षा नीति के ड्राफ्ट में

नयी शिक्षा नीति के प्रस्ताव में कहा गया है कि प्री-स्कूल और पहली क्लास में बच्चों को तीन भारतीय भाषाओं के बारे में भी पढ़ाना चाहिए, जिससे वह इन्हें बोलना सीखें और इनकी स्क्रिप्ट पहचानें और पढ़ें. तीसरी क्लास तक मातृभाषा में ही लिखें और उसके बाद दो और भारतीय भाषाएं लिखना भी शुरू करें. अगर कोई विदेशी भाषा भी पढ़ना और लिखना चाहे तो यह इन तीन भारतीय भाषाओं के अलावा चौथी भाषा के तौर पर पढ़ाई जाये.

इसे भी पढ़ें – भारत नहीं रहा सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था, अब क्या?

Advt

Related Articles

Back to top button