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देश में किसानों की देखने व सुननेवाला कोई नहीं: राजेश

Ranchi : झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने राजस्थान में हो रहे नव संकल्प शिविर में किसानों के मुद्दों पर चर्चा के दौरान कहा कि इस देश में किसानों की सबसे बड़ी आबादी है. फिर भी उसे कोई देखने व सुननेवाला नहीं है, विशेष कर छोटे व मंझोले किसानों को. कृषि एक ऐसा सेक्टर है, जिसमें सबसे ज्यादा लोग रोजगार के लिए निर्भर हैं. 61.5% ग्रामीण परिवार खेती पर अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर हैं. देश में 85% किसान तो छोटे सीमांत किसान की श्रेणी में आते हैं. ये लोग तो बुनियादी जरूरत को भी पूरा नहीं कर पाते.
खेती में मशीन का कम इस्तेमाल होना कम उत्पादकता का कारण

कम उत्पादकता का कारण खेती में मशीनीकरण का कम होना है. हमारे देश में 50% मशीनीकरण है जबकि अमेरिका में 95% और ब्राजील में 75% मशीनीकरण है.

श्री ठाकुर ने कहा कि बीज, मशीनीकरण, भंडारण, मार्केटिंग, रिसर्च पर ज्यादा खर्च, डेयरी-फिशरीज का बजटीय आबंटन ग्रोथरेट के हिसाब से, जलवायु परिवर्तन के जोखिमों से निपटने की व्यवस्था मजबूत करना ज़रूरी है, तभी हम सोनिया गांधी, राहुल गांधी की सोच का भारत बना सकेंगे.

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फल एवं सब्ज़ी को भी मिनिमम सपोर्ट प्राइस की ज़रूरत

राजेश ठाकुर ने कहा कि ये ठीक है कुछ फसलों को MSP मिलती है, उसका दायरा बढ़ा कर सब्ज़ी उगाने वाले किसानों तक ले जाने की ज़रूरत है. फल एवं सब्ज़ी को भी मिनिमम सपोर्ट प्राइस की ज़रूरत है. क़र्ज़ माफ़ी पर्मानेंट सॉल्यूशन नहीं है इसलिए हमें छोटे किसानों को मदद करने की ज़रूरत है.

उन्हें बिजली में भी सब्सिडी दिये जाने की ज़रूरत है. अपने राज्य झारखंड में 3,90,090 किसानों का 50 हज़ार तक का कर्ज़ माफ़ किया है, फिर भी किसानों की हालत अच्छी नहीं कही जा सकती.

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