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सूचना के अधिकार को लेकर नहीं दिखती सजगता, 15 सालों में पूरे देश के महज 2.5% लोगों ने RTI किया इस्तेमाल

सूचना आयोगों में इंफॉर्मेशन कमिश्नर के 160 में से 38 पद हैं खाली

RTI के पालन में दुनियाभर में भारत की रैंकिंग अब सातवीं पोजिशन पर 

अपनी सालाना रिपोर्ट बनाने में झारखंड का परफॉर्मेंस खराब

New Delhi:  सूचनाधिकार कानून (RTI) के 15 बरस 12 अक्टूबर को पूरे हो गए. ट्रांसपेरेंशी इंटरनेशनल इंडिया ने इस पर अपनी एक सालाना रिपोर्ट जारी की है. अपनी चौथी वार्षिक रिपोर्ट में उसने बताया है कि आरटीआइ कानून 2005 में देश में लागू हुआ. अब भी इसे लेकर जागरूकता काफी कम है. यही वजह है कि 15 सालों में देशभर में मात्र 3.33 करोड़ लोगों ने यानि तकरीबन 2.5% ने ही सूचनाधिकार कानून का इस्तेमाल किया है.

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2005 से 2019 के दौरान केंद्रीय स्तर के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों से जुड़ी जानकारियों के लिये 92,63,564 आवेदन किये गये. देश के सूचना आयोगों में इस दौरान 23 लाख से अधिक अपील और शिकायत रजिस्टर्ड कराये गये. अलग-अलग राज्यों के सूचना आयोगों में सूचना आयुक्तों के 160 पदों के विरूद्ध 38 पद खाली पड़े हुए हैं. RTI के पालन में दुनियाभर में भारत की रैंकिंग 2020 में सातवीं पोजिशन पर है. 2019 में देश दूसरे पायदान पर था.

वार्षिक रिपोर्ट जारी करने में आयोगों की रुचि नहीं

रिपोर्ट के मुताबिक 2017-18 से लेकर 2018-19 के बीच अधिकांश राज्य सूचना आयोग ने समय पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित करने में रुचि नहीं दिखायी. इस दौरान केंद्रीय सूचना आयोग सहित छत्तीसगढ़ जैसे राज्य ने ही समय पर रिपोर्ट तैयार की. झारखंड सहित मध्य प्रदेश, बिहार और अन्य राज्यों के सूचना आयोग ने वार्षिक रिपोर्ट तैयार करने में देर की. उत्तर प्रदेश का सूचना आयोग तो 2005 से 2019 तक की वार्षिक रिपोर्ट सार्वजनिक ही नहीं कर सका है.

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कौन है Transparency International India

TII इंडिया भ्रष्टाचार और पारदर्शिता पर काम करने वाली एक जानी मानी संस्था है. देश में पारदर्शिता की मुहिम औऱ उसकी स्थिति से जुड़े विषय पर रिपोर्ट जारी करती है. संस्था ने रिपोर्ट तैयार करने में आऱटीआइ से जुड़े महत्वपूर्ण एक्ट 25 (2), सेक्शन 19 (1) सहित आयोगों में खाली पड़े पदों, बजट, वार्षिक रिपोर्ट और वेबसाइट पर फोकस किया है. रिपोर्ट में राज्य सूचना आय़ोग से जानकारी प्राप्त करके आंकड़ों को जारी किया गया है. 2005-2019 के बीच उपलब्ध आंकड़ों को आधार बनाया गया है.

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