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इस गांव में है दो पत्नियां रखने की परंपरा, कारण जानेंगे तो चौंक जायेंगे आप

Jaipur :   हमारे देश में ऐसे कई गांव हैं जो अपने खास तरह रीति-रिवाज और परंपराओं के लिए जाने जाते हैं. एक गांव ऐसा भी है जहां की परंपरा चौंकाती है. राजस्थान के जैसलमेर ( Jaisalmer ) जिले के एक गांव में पुरूषों द्वारा दो शादियां करने की परंपरा है.

इस गांव का नाम है रामदेयो की बस्ती (Ramdeyo-Ki-Basti). जैसलमेर ( Jaisalmer ) जिले के इस गांव में अधिकतर पुरुषों के पास दो पत्नियां हैं. यह बात भले ही चौंकाने वाली है पर सच है. राजस्थान (Rajasthan) के इस गांव में दूसरी शादी करने की परंपरा कई दशकों से चली आ रही है. इस परंपरा सीधा का कनेक्शन बच्चे के जन्म से है.

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एक कारण ये है

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TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, रामदेयो की बस्ती गांव में मान्यता है कि किसी भी मर्द की पहली पत्नी कभी गर्भधारण नहीं कर पाती. अगर वो गर्भधारण करने में सफल हो जाती है तो भी उसे बेटा नहीं, बल्कि बेटी होती है. ऐसा होने से गांव में बेटियों की संख्या बढ़ जाती है. इसलिए यहां के मर्द दो शादी करते हैं ताकि उनके घर में बेटे का जन्म हो. इसको लेकर यहां एक और मान्यता है.

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इसलिए करते हैं दूसरी शादी

गांववालों का मानना है कि दूसरी पत्नी से जन्म लेने वाली संतान पुत्र ही होती है, इसलिए दो शादी करने की परंपरा आज भी कायम है. हालांकि वर्तमान की नई और पढ़ी-लिखी पीढ़ी इसे पूरी तरह सही नहीं मानती और न ही इसमें पूरी तरह से यकीन करती है. गांव में बदलाव की शुरुआत तो हो चुकी है, लेकिन पुराने और बुजुर्ग लोग आज भी अपनी उसी परंपरा पर कायम हैं.

इस परंपरा को मानने वाले गांव वालों का कहना है कि उनके पास दोबारा शादी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था क्योंकि पहली पत्नी गर्भधारण करने में असमर्थ थी. वहीं, कुछ का कहना है, पहली पत्नी ने बेटी को जन्म को दिया था और बेटे पाने की चाह में दूसरी शादी की.

ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर महिलाएं इस परंपरा पर आपत्ति क्यों नहीं जताती. इस पर गांववालों का कहना है, यहां पर मर्द दोनों ही बीवियों को बराबरी के अधिकार देते हैं और खुश रखते हैं, इसलिए महिलाओं को इस रिवाज से दिक्कत नहीं होती.

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नयी पीढ़ी में एक पत्नी का रिवाज

गांववालों का कहना है, यहां कभी भी दो बीवियों के कारण परिवार में विवाद की स्थिति नहीं बनी. परिवार में जन्म लेने वाले बच्चे की दोनों पत्नियां बराबरी से देखभाल करती हैं. दोनों ही पत्नियां खुशी-खुशी साथ में रहती हैं. इसलिए इस परंपरा पर कभी सवाल नहीं उठाए गए. हालांकि, अब नई पीढ़ी इस परंपरा से दूर बना रही है. इसलिए युवाओं में दो शादी करने के मामले न के बराबर हैं

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