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India’s Most Haunted Railway Station : रांची से 90 किमी दूर है एक रेलवे स्टेशन जहां ट्रेन से रेस लगाती है एक प्रेतात्मा

Jamshedpur : कहा जाता है कि शाम ढलने के बाद इस स्टेशन से जैसे ही कोई ट्रेन गुजरती, एक भूत उसके साथ-साथ दौड़ने लगता. लोको पायलटों में उस भूत का इतना खौफ था कि स्टेशन आने के पहले ही ट्रेन की स्पीड बढ़ा देते, लेकिन भूत दौड़ता हुआ कई बार ट्रेन से भी आगे निकल जाता. प्रेतात्मा को ट्रेन के आगे पटरियों पर भी नाचते हुए देखने की बात भी कही गयी. इस भूत के खौफ के कारण वहां पायलट वहां ट्रेन रोकना नहीं चाहता था. आखिरकार रेलवे ने उस स्टेशन को बंद कर दिया और 2009 में दोबारा जब इसे खोला गया, तो इसे बंद हुए 42 साल गुजर गये थे. भूत का खौफ इस कदर है कि आज भी शाम ढलने के बाद यह स्टेशन वीराने में डूब जाता है. यह भुतहा स्टेशन रांची रेलवे स्टेशन (Ranchi Railway Station) से महज 90 किमी दूर है. दक्षिण-पूर्व रेलवे (South Eastern Railway) के रांची रेल मंडल (Ranchi Rail Division) पर झालदा और कोटशिला स्टेशनों के बीच है यह स्टेशन, जिसका नाम है बेगुनकुदर (Begunkodor railway station). रांची (Ranchi) से ट्रेन से  आसनसोल या खड़गपुर जानेवाले यात्री इस स्टेशन से परिचित तो हैं, लेकिन बहुत कम ही लोग जानते हैं कि रेलवे के रिकॉर्ड में यह भारत के 10 प्रेतबाधित स्टेशनों में से एक था.

बेगुनकुदर स्टेशन संतालों की रानी लाचन कुमारी और रेलवे के साझा प्रयासों से वर्ष 1960 में खुला.लेकिन कुछ सालों बाद ही यहां भूत होने की अफवाह फैल गयी. ग्रामीणों के अनुसार 1967 में एक रेलकर्मी को उस महिला का भूत दिखा, जिसकी कुछ दिन पहले बेगुनकुदर स्टेशन पर ट्रेन से कट कर मौत हो गयी थी. अगली सुबह उसने गांववालों को भूत देखने की बात बतायी, लेकिन गांववालों को उसकी बात पर यकीन नहीं हुआ. लेकिन रेलकर्मी के भूत देखने के दावे के कुछ दिन बाद से यहां के स्टेशन मास्टर और उनके परिवारजनों की लाशें उनके रेलवे क्वार्टर में मिलीं. इसके बाद कई लोगों ने भूत देखने के दावे किये. कथित रूप से असामान्य घटनाएं होने लगीं और ऐसा मान लिया गया कि उन घटनाओं को पारलौकिक शक्तियों ने अंजाम दिया है.

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बेगुनकुदर स्टेशन पर भूत का खौफ इस कदर छाया कि ट्रेन पायलटों ने यहां ट्रेनों को रोकना बंद कर दिया. यात्री  महिला प्रेतात्मा के खौफ से स्टेशन पर आने से कतराने लगे.  यहां तक कि स्टेशन पर काम करने वाले रेलकर्मी भी यहां से भाग निकले और रेल कर्मचारियों ने इस स्टेशन पर अपनी पोस्टिंग कराने से इनकार कर दिया. बेगुनकुदर को भूतिया रेलवे स्टेशन (Haunted Railway Station) मान लिया गया और यह रेलवे के रिकॉर्ड में भी दर्ज हो गया. आखिरकार रेलवे ने इसे प्रेतबाधित मानते हुए स्टेशन को ही बंद कर दिया. 1967 में आखिरी ट्रेन वहां  रुकी थी. हालांकि इस रूट से होकर ट्रेनों का गुजरना जारी रहा और कई लोको पायलटों ने दावा किया कि सूरज ढलने के बाद महिला का भूत ट्रेन के साथ-साथ दौड़ने लगता था और कभी-कभी तो ट्रेन से भी तेज दौड़कर उसके आगे निकल जाता था. कुछ पायलटों का कहना था कि कई बार उन्होंने उस प्रेतात्मा को ट्रेन के आगे पटरियों पर भी नाचते हुए देखा है.

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साल 1990 के अंत में बेगुनकुदर के ग्रामीणों ने रेलवे स्टेशन को दोबारा खुलवाने के लिए आंदोलन शुरू किया. उन्होंने एक समिति का गठन कर रेलवे (Indian Railway) के सामने अपनी मांगें रखनी शुरू की. 2007 में ग्रामीणों ने तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) और माकपा नेता बासुदेव आचार्य को पत्र लिखा, जो पुरुलिया से ताल्लुक रखते हैं और उस समय संसद में रेलवे की स्थायी समिति के सदस्य थे. लेकिन बेगुनकुदर के प्रेतबाधित होने का ठप्पा बरकरार रहा. वासुदेव आचार्य ने कहा कि रेलवे कर्मचारियों ने बेगुनकुदर स्टेशन पर तैनात होने से बचने के लिए भूत की कहानी गढ़ी थी. आखिरकार  42 साल बाद, अगस्त 2009 में पूर्व रेल मंत्री ममता बनर्जी द्वारा रेलवे स्टेशन को एक पैसेंजर हॉल्ट के रूप में फिर से खोल दिया गया. वर्तमान में बेगुनकुदर स्टेशन पर नियमित रूप से 10 ट्रेनें रुकती हैं, लेकिन अभी भी यात्री सूर्यास्त के बाद भी स्टेशन आने से बचते हैं. लंबे समय से बेगुनकुदर स्टेशन भूत पकड़नेवालों (Ghost Hunters) की दिलचस्पी का केंद्र रहा है. इनमें से किसी ने यहां भूत होने की पुष्टि नहीं की है.  हालांकि पिछले कुछ समय से कुछ लोगों द्वारा बेगुनकुदर रेलवे स्टेशन को भूतों में दिलचस्पी रखनेवाले टूरिस्ट को आकर्षित करने का प्रयास किया जा रहा है.

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