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गुरुजी के झामुमो और हेमंत के झामुमो में जमीन–आसमान का अंतर, सत्ता के लिए अब कितने दरवाजे मत्था टेकेंगे हेमंत : भाजपा

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Ranchi : हेमंत सोरेन द्वारा कांग्रेस मुख्यालय जाकर की गयी प्रेस वार्ता पर भाजपा ने झामुमो को निशाना साधा. भाजपा ने शुक्रवार को कहा कि शिबू सोरेन के समय के झामुमो और हेमंत सोरेन के झामुमो में जमीन-आसमान का अंतर दिखने लगा है. स्थिति अब यह है कि सत्ता पाने के लालच में हेमंत सोरेन अब विभिन्न पार्टियों के दरवाजों जाकर मत्था टेकते चल रहे हैं. वहीं, भाजपा ने विपक्ष द्वारा पांच जुलाई को बुलाये झारखंड बंद को पूरी तरह से असफल बताया.

झारखंड बंद की मांग को जनता ने किया रिजेक्ट : प्रतुल शाहदेव

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने विपक्ष द्वारा पांच जुलाई को बुलाये झारखंड बंद को पूरी तरह से असफल बताया. उन्होंने कहा कि जनता कभी विपक्ष की बातों पर नहीं आनेवाली. इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जनता ने विपक्ष की मांग को पूरी तरह से रिजेक्ट कर दिया. वहीं, हेमंत सोरेन के कांग्रेस ऑफिस जाकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के मुद्दे पर शाहदेव ने कहा कि गुरु जी (शिबू सोरेन) के समय के झारखंड मुक्ति मोर्चा और हेमंत सोरेन के झारखंड मुक्ति मोर्चा में आसमान-जमीन का अंतर हो गया है. गुरुजी आंदोलन की अगुवाई किया करते थे, लेकिन झामुमो की अब की स्थिति यह है कि झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन सत्ता के लिए दरवाजा-दरवाजा मत्था टेकते चल रहे हैं.

विपक्ष का दावा है गलत, कांग्रेस में एकमत नहीं

शाहदेव ने कहा कि आज विपक्ष का यह दावा कि बंद में एक लाख से ज्यादा लोग गिरफ्तार हुए, पूरी तरह से हास्यास्पद है. जब नेता प्रतिपक्ष सड़क पर उतरे, तो उनके साथ बमुश्किल 20-25 लोग थे. 19 विधायक वाले झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता के साथ सिर्फ 25 लोगों का ही रहना जमीनी हकीकत बयां करता है. कांग्रेस को यह बताना चाहिए कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व को क्या प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार ने स्वीकारा है या पूरे कांग्रेस का निर्णय है, क्योंकि कल गुरुवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय बाबूलाल मरांडी के साथ जुलूस में शामिल थे, जबकि अन्य कांग्रेसी नेता अलग-अलग थे. साफ है कि कांग्रेस के नेता किसी भी मुद्दे पर एकमत नहीं हैं. शाहदेव ने कहा कि बंद के दौरान विपक्ष के नेताओं ने जिस तरीके से हिंसा की कोशिश की, वह अति निंदनीय है. दिव्यांग टीचर को पीटा गया. बच्चों को कांग्रेस के झंडे पकड़ाये गये. बच्चों को सड़क जाम करने के लिए सड़क पर भोजन का लालच देकर बैठाया गया. विपक्षी दलों ने नैतिकता की सभी सीमाएं तोड़ लांघ दी.

संवैधानिक पद पर रहते कैसे सड़क पर उतरे नेता प्रतिपक्ष

शाहदेव ने नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन से जानना चाहा कि जब उच्च न्यायालय ने झारखंड मुक्ति मोर्चा द्वारा बंद बुलाने और बंद को लागू करने पर पाबंदी लगा रखी थी, तो वह संवैधानिक पद पर रहते हुए कैसे सड़क पर उतरे. कैसे उनके कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह तोड़फोड़ करने की कोशिश की? क्या यह पूरा प्रकरण स्पष्ट नहीं करता कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेताओं की संवैधानिक संस्थाओं पर कोई आस्था नहीं है.

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