न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

मौजूदा कर-दरों में बदलाव नहीं हुआ है, कुछ छूट के साथ आयकर के झंझट कम हुए हैं

 प्रभारी वित्त मंत्री पीयूष गोयल द्वारा पेश अंतरिम बजट को लेकर जानकारों का मानना है कि वर्ष 2019-20 के अंतरिम बजट ने व्यक्तिगत आयकरदाताओं में खूब भ्रम पैदा किया है.

257

NewDelhi : प्रभारी वित्त मंत्री पीयूष गोयल द्वारा पेश अंतरिम बजट को लेकर जानकारों का मानना है कि वर्ष 2019-20 के अंतरिम बजट ने व्यक्तिगत आयकरदाताओं में खूब भ्रम पैदा किया है. उनके अनुसार गोयल ने छोटे व मझले आयकरदाताओं को राहत देने के लिए पांच लाख रुपए तक की सालाना आमदनी वालों को आयकर से मुक्त करने की घोषणा की,  पर लोगों ने इसे आयकर छूट सीमा बढ़ाना समझ लिया. जबकि ऐसा नहीं है. हालांकि उनकी घोषणा से  हर कोई खुश नजर आया कि  आयकर छूट की मौजूदा सीमा ढाई लाख रुपए सालाना को दोगुना कर सरकार ने पांच लाख रुपए कर दिया है.  बता दें कि इस स्लैब की आमदनी पर आयकर की दर दस फीसद है.  लोगों को मान लिया कि पांच लाख या उससे ज्यादा आमदनी वाले हर आयकरदाता को सरकार ने पच्चीस हजार रुपए का सीधा लाभ पहुंचाया है, लेकिन जब बजट पेश करने के बाद पीयूष गोयल ने प्रेस कांफ्रेंस में छूट की स्थिति साफ की तो ज्यादातर लोगों की खुशी गायब हो गयी.  गोयल ने बात साफ की कि सरकार ने न तो आयकर छूट की सीमा बढ़ाई है और न मौजूदा कर-दरों में कोई बदलाव किया है.

 

इसी क्रम में स्रोत पर आयकर कटौती यानी टीडीएस से जुड़ी दो घोषणाओं को लेकर भी ज्यादातर लोग भ्रमित हुए. बजट में  प्रभारी वित्त मंत्री ने कहा कि अब बैंक ब्याज की 40 हजार रुपए तक की सालाना आमदनी पर टीडीएस की कटौती नहीं करेंगे.  मौजूदा सीमा दस हजार है.  इसे भी ज्यादातर लोगों ने ब्याज की आय पर आयकर से छूट मान लिया.

सरकार ने आयकर से छूट नहीं बल्कि रिफंड लेने के झंझट से करदाताओं को राहत दी है

किराये की आमदनी से जुड़ी घोषणा को लेकर भी यही स्थिति नजर आयी. बता दें कि गोयल ने किराये की आमदनी पर टीडीएस की कटौती से छूट की मौजूदा सीमा एक लाख 60 हजार रुपए को बढ़ा कर दो लाख 40 हजार रुपए सालाना तय किया है. पर इसका यह मतलब नहीं होगा कि किराये की कमाई पर आयकर से मुक्ति मिल गयी. जान लें कि टीडीएस की कटौती से टैक्स पेयर  के लिए आयकर रिटर्न भरना जरूरी हो जाता है.  भले ही उसकी आमदनी कर योग्य हो या न हो. यानी सरकार ने आयकर से छूट नहीं बल्कि रिफंड लेने के झंझट से करदाताओं को राहत दी है. हालांकि   नौकरीपेशा तबके के लिए अंतरिम बजट में थोड़ी राहत मानक कटौती के रूप में जरूर दी गयी है.  मानक कटौती को 40 हजार रुपए से बढ़ाकर 50 हजार रुपए सालाना करने का प्रस्ताव किया गया है.  पांच लाख रुपए से अधिक कर योग्य आमदनी वालों को पहले की तरह ही आयकर चुकाना होगा.  उन्हें कोई राहत नहीं देने के बाबत सवाल पर  प्रभारी वित्त मंत्री बोले कि चुनाव बाद जब सरकार पूर्ण बजट लायेगी तो उनके बारे में भी सोचेगी. संपत्ति से होने वाली आय पर आयकर बचाने के लिए सरकार ने कुछ राहत जरूर दी है. अभी तक ऐसी आय को एक घर खरीदने पर खर्च करने से आयकर छूट मिलती थी.  अंतरिम बजट में यह छूट अब दूसरा घर खरीदने की सूरत में भी देने की घोषणा की गयी है.

Related Posts

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा,  स्वतंत्रता उन लोगों पर जहर उगलने का माध्यम बन गयी  है, जो अलग तरह से सोचते हैं

चंद्रचूड़ के अनुसार खतरा तब पैदा होता है जब आजादी को दबाया जाता है, चाहे वह राज्य के द्वारा हो, लोगों के द्वारा हो या खुद कला के द्वारा हो.

SMILE

हालांकि यह बंदिश भी लगाई गयी है कि संपत्ति से आय दो करोड़ रुपए से कम होने पर ही यह लाभ मिलेगा और जीवन में इसका फायदा केवल एक बार ही मिल पायेगा.  पांच लाख रुपए तक की सालाना आमदनी वालों को आयकर के दायरे से बाहर कर देने के फैसले को लेकर  प्रभारी वित्त मंत्री ने कहा कि इससे सरकारी खजाने पर 18 हजार 500 करोड़ रुपए सालाना का बोझ पड़ेगा. उन्होंने अनुमान जताया कि इससे तीन करोड़ लोग लाभान्वित होंगे.  इसी तरह मानक कटौती की सीमा बढ़ाने से आयकर दाताओं को 4700 करोड़ रुपए का फायदा पहुंचेगा.

इसे भी पढ़ें : राहुल का हमला, नोटबंदी और भ्रष्टाचार को लेकर मोदी सरकार पर होगी सर्जिकल स्ट्राइक

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like
%d bloggers like this: