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शिक्षा व्यवस्था चौपट! कला संकाय के छह विषयों में 3 लाख 27 हजार छात्र, शिक्षक एक भी नहीं

Ranchi:   राज्य की शिक्षा व्यवस्था चैपट है! राज्य भर में कला संकाय के जेक बोर्ड में पढ़ने वाले करीब 3 लाख 27 हजार बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है.

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राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, जनजातीय एंव क्षेत्रीय भाषा, मनोविज्ञान और दर्शनशास़्त्र विषय पढ़ने वाले बच्चे अगर इन विषयों में फेल हो जाते हैं तो ये पूरी तरह से सरकार की गलती है, और अगर पास हो जाते हैं तो उन बच्चों की काबिलियत.

ऐसा इसलिए क्योंकि इन विषय के एक भी शिक्षक राज्य में नहीं हैं. जैक द्वारा संचालित प्लस टू स्कूल और इंटरमीडियट के ये आंकड़े हैं. ये आंकड़े जैक से आरटीआई के जरीये प्राप्त किये गये हैं.

यह आंकड़े 3 अगस्त 2017 तक के हैं. 2018 में छात्रों की संख्या बढ़ोतरी या घटोतरी संभव है पर शिक्षक एक भी नहीं हैं. झारखंड हाईकोर्ट ने नवंबर 2018 तक शिक्षकों के पद सृजन को लेकर आदेश जारी किया था. लेकिन सरकार अब तक नियुक्ति नहीं कर पायी है.

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किन विषयों के कितने छात्र

जैक द्वारा दिये गये आंकड़ों के अनुसार राजनीति विज्ञान में एक लाख 48 हजार 920 छात्र, समाजशास्त्र में 96 हजार 468 छात्र, जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा के 21 हजार 236 छात्र,  मनोविज्ञान के 30 हजार 295 छात्र, और दर्शनशास्त्र के 19 हजार 789 छात्र बिना शिक्षक के इन शिक्षकों की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं.

इन विषयों की कॉपियां कैसे जांची जाती हैं, ये भी जांच का विषय है

सबसे मजेदार बात ये है कि लाखों की संख्या में इन विषयों के छात्र परीक्षा देते हैं. प्रतिवर्ष लगभग इतने छात्र परीक्षा पास भी करते हैं. परीक्षा देने और पास होने के बीच भी एक प्रक्रिया है. कॉपी जांचना.

शिक्षक हैं ही नहीं तो फिर कॉपियों को जांचता कौन है. अगर बच्चे फेल होते हैं तो उनकी मार्किंग किस आधार पर होती है. ये बड़ा सवाल है जिसका जवाब सरकार को देना चाहिये.

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स्टूडेंट्स भर रहे हैं खामियाजा

शिक्षक नहीं होने के कारण छात्रों को अच्छे नंबर नहीं मिल पाते. नतीजतन रिजल्ट का प्रतिशित बहुत ही कम होता है.

पिछले पांच सालों के नंबर पर गौर करें तो कोई भी टॉपर बड़े विवि में कट ऑफ मार्क्स के करीब नंबर नहीं ला पाता. डीयू जेएनयू जैसे विश्वविद्यालयों में कट ऑफ मार्क्स 95 प्रतिशत के उपर ही होता है.

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