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सेना के कब्जे वाली जमीन को फर्जी तरीके से बेचने के आरोप में दो रजिस्टार, नगर आयुक्त, सीओ सहित 10 हैं आरोपी, कोतवाली थाने में दर्ज होगा मामला

Ranchi: राजधानी रांची के 4.55 एकड़ आर्मी की कब्जे वाली रैयती जमीन की फर्जी तरीके से खरीद ब्रिकी मामले में कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज की जायेगी. बड़गाईं अंचल के मोरहाबादी मौजा स्थित 4.55 एकड़ जमीन मामले में बरियातू थाना में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश ज्यूडशियल मजिस्ट्रेट अशोक कुमार की कोर्ट ने दी थी. लेकिन मामला रजिस्ट्री ऑफिस से जुड़े होने के वजह से अब कोतवाली थाना में प्राथमिकी दर्ज की जायेगी.

मामले को लेकर बरियातु थाना प्रभारी ज्ञान रंजन ने लिखित जानकारी कोर्ट को दी है. रजिस्ट्रार घासी राम पिगुआ और वैभव मनी त्रिपाठी, नगर आयुक्त मुकेश कुमार, बड़गाईं के सीओ मनोज कुमार, फर्जी रैयत प्रदीप बागची, खरीदार जगतबंधु टी-इस्टेट के डायरेक्टर दिलीप कुमार घोष, जयप्रकाश नारायण सिन्हा, मेसर्स गोयल बिल्डर्स अपर बाजार के निदेशक, मोहम्मद जैकुल्लाह और मानवेंद्र प्रसाद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया गया है. आरोप है कि इन लोगों जान-बूझकर फर्जीवाड़ा कर दूसरे की जमीन की खरीद-बिक्री की है. दिलीप कुमार घोष ने सात करोड़ रुपये में प्रदीप बागची नामक कथित रैयत से सेना के कब्जे वाली 4.55 एकड़ जमीन खरीदी थी. कोर्ट में इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि आर्मी के कब्जे वाली जमीन के असली मालिक जयंत करनाड हैं. वही आयुक्त की रिपोर्ट में इसका उल्लेख है कि वर्ष 1967 से 2017 तक विभिन्न न्यायालयों ने खतियानी रैयत के वंशजों को उक्त भूमि का मालिक स्वीकार किया है.

आरोपी पर जानबूझकर फर्जीवाड़ा का है आरोप

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इस विवादित जमीन की रांची रेंज के कमिश्नर ने जांच करवायी थी. जांच रिपोर्ट के अनुसार आर्मी के कब्जे वाली जयंत करनाड की जमीन पर प्रदीप बागची नामक व्यक्ति फर्जी तरीके से दिलीप कुमार घोष को रजिस्ट्री कर दी. आरोपी पर जानबूझकर फर्जीवाड़े का आरोप है. आयुक्त कार्यालय की रिपोर्ट में पंजी-टू के रैयत जयंत करनाड ने वर्ष 2019 में 13 रैयतों को निबंधित दस्तावेज से बिक्री की थी, जिनके दाखिल खारिज को बड़गाइ अंचल ने यह कहते हुए अस्वीकृत किया कि उक्त जमीन पर उनका कब्जा नहीं, आर्मी का कब्जा है. दूसरे कथित रैयत प्रदीप बागची ने वर्ष 2021 में आनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से पोजेशन सर्टिफिकेट, आधार कार्ड, बिजली बिल देकर रांची नगर निगम से होल्डिंग करवा लिया गया. नगर निगम ने भी बिना भौतिक सत्यापन के होल्डिंग कायम किया. आयुक्त कार्यालय ने अफसरों की भूमिका पर भी सवाल उठाया था और अपने निष्कर्ष में प्रदीप बागची के निबंधित दस्तावेज पर सवाल उठाते हुए कपटपूर्ण निबंधित कराने के आरोपों को सही पाया था.

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