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 …तो वरवरा राव को उम्रकैद या फांसी तक की सजा मिल सकती है

78 वर्षीय ऐक्टिविस्ट तेलुगु कवि पी वरवरा राव और दूसरे आरोपियों के खिलाफ यल्गार परिषद मामले में आईपीसी की धारा 121 के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी मांगी गयी है.

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Mumbai : 78 वर्षीय ऐक्टिविस्ट तेलुगु कवि पी वरवरा राव और दूसरे आरोपियों के खिलाफ यल्गार परिषद मामले में आईपीसी की धारा 121 के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी मांगी गयी है. मंजूरी महाराष्ट्र सरकार की वकील उज्ज्वला पवार ने यूएपीए कोर्ट में मांगी है. कानून के जानकारों के अनुसार यदि फड़नवीस सरकार आईपीसी की धारा 121 यानी देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी देती है तो दोषसिद्ध होने पर वरवरा को मौत की सजा या फिर उम्रकैद हो सकती है. इस संबंध में जांच अधिकारी एसीपी शिवाजी पवार ने बताया कि हमने वरवरा के खिलाफ एफआईआर में 30 अक्टूबर को धारा 121, 124-ए और 505 के तहत 3 नये आरोप लगाये हैं.  नये आरोपों की मंजूरी के लिए अपर मुख्य सचिव को प्रस्ताव सौंपा है. जान लें कि रविवार दोपहर कड़ी सुरक्षा के बीच पुणे पुलिस ने वरवरा राव को कोर्ट में पेश किया था. इसके बाद विशेष जज केडी वडाणे ने 26 नवंबर तक वरवरा रव को हिरासत में भेजने का आदेश दिया.

वकील उज्ज्वला पवार ने कहा कि वरवरा राव मुख्य साजिशकर्ता में से एक थे और उन्हें नेपाल और मणिपुर के सप्लायर्स से हथियारों और गोला बारूद का चयन और खरीदने के लिए सीपीआईएम नेतृत्व द्वारा अधिकृत किया गया था.  उज्ज्वला के अनुसार जांच में सामने आया है कि वरवरा और अन्य ने देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने और माओवादी अजेंडा के प्रचार के लिए छात्रों को उकसाने की आपराधिक साजिश रची थी.

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परिषद ने सरकार के खिलाफ लोगों का गुस्सा भड़काने की साजिश रची

वरवरा राव ने कोर्ट में अपना पक्ष रखा कि उन्हें बिना किसी उचित वॉरंट के गिरफ्तार किया गया.  जिस तरह पुलिस द्वारा उऩ्हें दोबारा हिरासत में लिये जाने पर वरवरा ने सवाल खड़े किये. वामपंथी रुझान रखने वाले तेलुगु कवि और लेखक वरवरा राव को पुणे पुलिस ने 28 अगस्त को माओवादियों से कथित तौर पर संबंध होने के आरोप में गिरफ्तार किया था.  महाराष्ट्र पुलिस ने वरवरा राव, अरुण फेरेरा, वर्नोन गॉनसैल्विस, सुधा भारद्वाज और गौतम नवलखा- को कोरेगांव भीमा हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार किया था.  पुलिस का दावा है कि इस प्रतिबंधित संगठन ने ही पिछले साल 31 दिसंबर को पुणे में एल्गार परिषद को समर्थन दिया था और फंडिंग भी की. परिषद ने हिंसा और सरकार के खिलाफ लोगों का गुस्सा भड़काने के लिए साजिश रची.

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