न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र का हाल बुरा, दवाई दोस्त में उपलब्ध सभी दवाएं

सिविल सोसाइटी की छह सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग टीम पहुंची रिम्स

41

Ranchi : स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी के दवाई दोस्त को बंद करनेवाले बयान के बाद झारखंड सिविल सोसाइटी की छह सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग टीम सोमवार को रिम्स पहुंची. टीम के सदस्यों ने यह जानने का प्रयास किया कि दवाई दोस्त किस प्रकार जरूरतमंद लोगों की मदद कर रहा है. सदस्यों ने पाया कि दवाई दोस्त के स्टोर पर सैकड़ों लोग दवा की खरीदारी करने पहुंचते हैं. डॉक्टरों के द्वारा लिखी जानेवाली लगभग सभी दवाएं इस स्टोर में मिल जाती हैं. ऐसी स्थिति में इस स्टोर को बंद करने का औचित्य नहीं है. टीम में शामिल सदस्य विकास सिंह ने बताया कि भ्रमण के दौरान यह महसूस किया गया कि दवाई दोस्त की सेवा गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए एक वरदान है. डॉक्टरों के द्वारा लिखे गये दवाओं के पुर्जों के आधार पर बिल्कुल पेशेवर और प्रभावी तरीके से दवाई दोस्त का संचालन रिम्स परिसर में किया जा रहा है. जिसका सीधा और बहुत बड़ा फायदा मरीजों और उनके परिजनों को प्राप्त हो रहा है. इस टीम में झारखंड सिविल सोसाइटी की ओर से विकास सिंह,  राजेश दास, आरपी शाही, विष्णु राजगढ़िया, रेणुका तिवारी और संदीप राजगढ़िया शामिल थे.

इसे भी पढ़ें- होनहार युवकों को अपराधी बनाती है धनबाद पुलिस, हम कुछ नहीं कर सकते : राज सिन्हा

प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र में नहीं रहती हैं दवाएं

टीम के सदस्यों ने बताया कि रिम्स परिसर में अवस्थित दवाई दोस्त में जहां दवा लेनेवालों की भीड़ लगी है वहीं बगल में ही अवस्थित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र का हाल बुरा है. प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र में जरूरत की सभी दवाएं उपलब्ध भी नहीं हैं. मरीजों के साथ जरूरी संयोजन के लिए कर्मियों की संख्या भी काफी कम है और पूरा सिस्टम जटिल सरकारी प्रक्रिया की वजह से बुरी तरह प्रभावित है. दवाइयों के लिए 6 माह पूर्व भेजे गए डिमांड के बावजूद अबतक पूरी दवाइयों का स्टॉक उपलब्ध नहीं कराया गया है. जिस वजह से मरीज इस स्टोर से दवा नहीं ले पाते. वहीं दवाई दोस्त के मुकाबले सरकारी दवा स्टोर अधिकांश समय बंद ही रहता है. सदस्यों ने बताया कि इस जन औषधि केंद्र को सिर्फ खोल कर छोड़ दिया गया है, लेकिन आगे कोई प्रक्रिया पूरी नहीं की गई और न ही इसके संचालन के लिए कोई भी सिस्टम अब तक बन पाया है. सदस्यों ने बताया कि टीम ने प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र की वर्तमान हालत का एक ब्यौरा प्रधामंत्री नरेन्द्र मोदी को भी भेजने का निर्णय लिया है. ताकि इस केंद्र का सही फायदा गरीबों और जरूरतमंद मरीजों को प्राप्त हो सके.

इसे भी पढ़ें – राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने रघुवर सरकार को घेरा, ट्वीट कर कहा, सस्ती बिजली छोड़ ले रहे महंगी बिजली

निजी संस्थान नियमों के दायरे में लाये जायेंगे : सुपरीटेंडेंट

भ्रमण के दौरान टीम के सदस्यों ने रिम्स के सुपरीटेंडेंट डॉ विवेक कश्यप से मुलाकात की. डॉ कश्यप ने बताया कि दवाई दोस्त को बंद करने जैसी कोई बात नहीं है, बल्कि रिम्स परिसर में दवाई दोस्त सहित अन्य अवस्थित सभी निजी संस्थानों को एग्रीमेंट के आधार पर नियमों के दायरे में लाये जाने की बात चल रही है. डॉ कश्यप ने दवाई दोस्त की सराहना करते हुए कहा कि यहां सभी दवाईयां मिल जाती हैं जिससे लोगों को काफी सहूलियत हो जाती है.

इसे भी पढ़ें – सीबीआइ अधिकारी मनीष सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, एक मंत्री ने भी ली ‘कुछ करोड़’ की रिश्वत, डोभाल का भी नाम जुड़ा

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

%d bloggers like this: