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दुनिया का सबसे बड़ा संविधान देश के पास, फिर भी नियम-कानून को लेकर संशय बना रहता है: आरएन झा

जातिवाद सामाजिक नहीं राजनीतिक बुराई बन चुका है

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Ranchi: वोट करना कोई कर्तव्य नहीं है, यह अधिकार है जो संविधान की ओर से लोगों को दिया गया है. लोग अगर मतदान करेंगे, तभी आनेवाले उम्मीदवार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर सकते हैं. जो वोट नहीं करते उन्हें यह भी अधिकार नहीं होना चाहिए कि वे जीते हुए उम्मीदवार पर सवाल खड़ा करें. उक्त बातें सेवानिवृत्त जिला सत्र न्यायाधीश सरयू प्रसाद ने कहीं. वे बाबा साहेब की जयंती सह वोट का अधिकार विषयक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे. संगोष्ठी का आयोजन ऑल इंडिया नेशनल फोरम फॉर एससी, एसटी एंड ओबीसी की ओर से सीएमपीडीआइ स्थित मयूरी प्रेक्षागृह में किया गया. इस दौरान सरयू प्रसाद ने कहा कि समाज के कुछ लोग समझते हैं कि वोट देना व्यर्थ है. लेकिन ऐसे लोगों को यह समझना होगा कि उनका एक-एक वोट कितना महत्वपूर्ण है. क्योंकि इसी से देश को नेतृत्व मिलता है. उन्होंने कहा कि संविधान की ओर से प्रदत्त प्रावधानों का लोगों का उचित उपयोग करना चाहिए.

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सबसे बड़ा संविधान है, पर संशय अधिक

मौके पर सीएमपीडीआइ के निदेशक आरएन झा ने कहा कि यूनाइटेड किंगडम में कोई लिखित संविधान नहीं है. लेकिन वहां का शासन और प्रशासन यहां तक कि जनता में कोई संशय नहीं रहता. सब कुछ सुचारू ही मिलेगा. वहीं भारत की बात की जाये तो यहां दुनिया का सबसे बड़ा संविधान है. लेकिन सही से अमल नहीं किया जाता. हर स्तर पर लोगों के बीच संशय देखने को मिलता है. उन्होंने कहा अगर जातिवाद से ऊपर उठ कर लोग कार्य करेंगे तो विकास होगा. लेकिन देश की स्थिति ऐसी है कि जहां हम थे अब भी वहीं हैं. लोगों के बीच वर्ण और समुदाय को छोड़ दें तो क्षेत्रीय आधार पर भी लोग लड़ते हैं. ऐसे में विकास कैसे संभव है. जरूरी है कि हर स्तर पर विकास हो.

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जातिवाद सामाजिक नहीं राजनीतिक बुराई

फोरम के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ सहदेव ने कहा कि वर्तमान समय में जातिवाद सामाजिक नहीं राजनीतिक बुराई बन गई है. चुनाव में जातिवाद के अनुसार वोट पड़ते हैं. जबकि वोट करने का अर्थ है देश के लिए निर्णायक शक्तियों को चुनना. उन्होंने कहा कि संविधान के साथ ही चार स्तंभों को सबसे अधिक शक्तियां दी गयीं. जो हैं सुप्रीम कोर्ट, भारतीय निर्वाचन आयोग, पब्लिक सर्विस कमिशन और ऑडिटर जेनरल ऑफ इंडिया. यदि बाकी तीन स्तंभों की बात न कर निर्वाचन आयोग की बात करें तो आयोग भी चुनाव के लिए दिये गये सही प्रावधानों का पालन नहीं करता. आयोग के नियमों के अनुसार जो व्यक्ति असक्षम हो या स्वास्थ्य ठीक नहीं हो उनका मतदान निवार्चन आयेाग की ओर से नियुक्ति कर्मचारी जा कर कराता है. लेकिन भारत में ऐसा नहीं होता.

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ये थे उपस्थित

मौके पर सुनीता मेहता, खालिदा रश्मि, नगेंद्र बैठा, मीरा कुमार समेत अन्य लोग उपस्थित थे.

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