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पीएम मोदी की विशाल जीत पर वाशिंगटन पोस्ट ने लिखा, हिंदू राष्ट्रवाद के लिए जनादेश मानेंगे मोदी   

Washington :  लोकसभा चुनाव 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारी बहुमत से जीत से वाशिंगटन पोस्ट हतप्रभ है. बता दें कि  वाशिंगटन पोस्ट में प्रकाशित एक लेख में मोदी की जीत पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया है कि भारत एक विशाल लोकतंत्र है लेकिन मोदी की जीत इस लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है.

लेख में चिंता जताई गयी है कि पीएम मोदी इस विशाल जनादेश को जरूरी आर्थिक सुधारों को बल देने की बजाय हिंदू राष्ट्रवाद के लिए जनादेश मानेंगे. वे  अमेरिका के साथ दोस्ताना संबंधों का फायदा उठा सकते हैं. अमेरिका भी भारत के करीबी संबंध बनाना चाहता है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी पीएम मोदी की प्रशंसा कर चुके हैं. ऐसे में वह अपनी तरफ से चुप्पी बनाए रख सकते हैं.

लेख के अनुसार पीएम मोदी पांच साल पहले आर्थिक सुधार, भ्रष्टाचार मुक्त शासन जैसे मुद्दों के बल पर सत्ता में आये थे. वहीं, इस चमत्कारिक नेता का चुनाव में मुद्दा इस बार बिल्कुल ही बदला हुआ था.

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  मोदी को यह जीत राष्ट्रवाद और सांप्रदायिकता के आधार पर मिली

लेख में कहा गया है कि पीएम मोदी को यह जीत पूरी तरह से राष्ट्रवाद और सांप्रदायिकता के आधार पर मिली है.इस बार चुनाव प्रचार में कश्मीर में आतंकी हमले के जवाब में परमाणु हमला करने जैसी बातें की गयी. जबकि यह साफ नहीं हो सका है कि बालाकोट में किये गये हवाई हमले में वायुसेना के विमानों ने पाकिस्तान में आतंकी शिविरों को नष्ट किया या नहीं. प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से हिंदू अंध राष्ट्रवाद की अपील की. भाजपा ने इस बार ऐसे वादे किये जिससे देश के 18 करोड़ मुसलमानों में नाराजगी पैदा होगी.

जैसे तोड़ी गयी मस्जिद के स्थान पर राम मंदिर का निर्माण. वाशिंगटन पोस्ट ने परोक्ष रूप से साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का जिक्र करते हुए कहा कि इस बार संसद में चुनी गयी एक प्रतिनिधि पर आतंकी हमले का आरोप है जिसमें मुसलमान मारे गये थे. इस सांसद ने महात्मा गांधी के हत्यारे को देशभक्त भी कहा था.

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पॉपुलिज्म की तरफ बढ़ रहे हैं पीएम मोदी

लेख में कहा गया है कि पीएम मोदी पॉपुलिज्म की तरफ बढ़ रहे हैं. इसे अर्थव्यवस्था को गति देने के उनके मिलेजुले रिकॉर्ड से देखा जा सकता है. उन्होंने नया दिवालिया कानून, जीएसटी जैसे कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं लेकिन दूसरे सुधारों को टाल दिया है. इसमें भूमि और रोजगार से जुड़े सुधार शामिल हैं. पीएम ने हर साल 1 करोड़ रोजगार देने का वादा किया था. इसके करीब पहुंचने के बजाय विकास दर सुस्त पड़ गयी और बेरोजगारी दर 6.1 फीसदी पर पहुंच गयी, यह पिछले 45 सालों में सबसे अधिक है.

पीएम की तरफ से गैर उदारवार रवैये को आगे बढ़ाने की बात कही गयी है.  लेख के अनुसार पीएम मोदी ने भारतीय मीडिया को नापसंद किया है.  उन्होंने पिछले पांच साल में एक भी औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की. आलोचना करने वाले कुछ पत्रकारों और गैर सरकारी संगठनों पर दबाव बनाने व डराने की बात भी कही गयी है.

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