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एफआइआर और माइंस की जांच के आश्वासन पर 7वें दिन समाप्त हुआ ग्रामीणों का आंदोलन 

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Palamu : एफआइआर और माइंस की जांच के आश्वासन पर भलही के ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन आंदोलन गुरुवार को सातवें दिन समाप्त हुआ. छतरपुर अनुमंडल पदाधिकारी भोगेंद्र ठाकुर, सीओ शिवशंकर पांडेय और खनन पदाधिकारी मनोज टोप्पो ने आंदोलनकारियों को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों पर गंभीरता पूर्वक कार्रवाई की जायेगी. जब तक जांच पूरी नहीं होगी, माइंस बंद रहेगा. गत शुक्रवार को हुई गोलीबारी और मारपीट मामले में छतरपुर थाना में शिकायत लेने के लिए ग्रामीणों को बुलाया गया है.

कार्रवाई के लिए दी गयी लिखित जानकारी

सातवें दिन अनशनस्थल पर पहुंचे अधिकारियों से आंदोलनकारियों के बीच वार्ता हुई. आंदोलनकारियों का नेतृत्व कर रही आइसा की दिव्या भगत ने बताया कि धरनास्थल पर पहुंचे अधिकारियों ने कार्रवाई के सिलसिले में लिखित आश्वासन दिया. ग्रामीणों ने मांग रखी कि उनके साथ अत्याचार हुआ है. थाना से लेकर सीओ और एसडीओ कार्यालय में शिकायत दर्ज कराने के लिए जाने पर उन्हें भगा दिया गया. इस पर छतरपुर एसडीओ ने उन्हें आश्वस्त किया कि शुक्रवार को सारे ग्रामीण थाना आ जाएं और अपनी शिकायत दर्ज कराएं, कार्रवाई की जायेगी.

जांच तक बंद रहेगा माइंस

आंदोलनकारियों ने बताया कि वार्ता के दौरान जिला खनन पदाधिकारी मनोज टोप्पो ने उन्हें लिखित जानकारी देते हुए बताया कि 15 दिनों के भीतर माइंस की जांच प्रक्रिया पूरी कर कार्रवाई की जायेगी. यह भी कहा कि जांच प्रक्रिया पूरी होने तक माइंस बंद रहेगा. ग्रामीणों ने कहा कि अगर उनकी मांगों पर 15 दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं की गयी तो उनके द्वारा पुनः समाहरणालय में आंदोलन शुरू किया जायेगा.

इन मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे ग्रामीण

भलही के ग्रामीण माइंस ठेकेदार और उनके सहयोगियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने, गांव से 30 मीटर की दूरी पर चल रहे माइंस को बंद करने, ग्रामीणों पर हुए फर्ज़ी एवं बेबुनियाद मुकदमे रद्द करने और मुकदमे में गिरफ्तार ग्रामीण सद्दाम अंसारी को तुरंत रिहा करने की मांग की जा रही थी.

संघर्ष के बल पर मिली जीत

आंदोलन की अध्यक्षता कर रही आइसा की दिव्या भगत, इजहार अली, भाकपा माले के अखिलेश, कपिल प्रजापति ने इसे संघर्ष की जीत बताया है. दिव्या भगत ने कहा कि सात दिनों वे ठंड में ठिठुर-ठिठुर कर अपनी एकजुटता बनाए हुए थे. उनकी चट्टानी एकता के आगे प्रशासन को झुकना पड़ा. माले नेताओं ने ग्रामीणों को विश्वास दिलाया कि उनकी लड़ाई में उनकी पार्टी हर पल खड़ी है. शर्ते पूरी न होने पर आंदोलन और तेज किया जायेगा.

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