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कुलाधिपति के आदेश को भी नजरअंदाज कर दे रहे हैं राज्य के छह विश्वविद्यालयों के कुलपति

 तीन साल पूर्व कुलाधिपति‍ ने विवि की परीक्षा प्रक्रिया डिजिटल करने को कहा था,  कोई भी विवि पूर्णतः डिजिटल नहीं बन पाया

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chhaya

 Ranchi : राज्य में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए कुलाधिपति और उच्च शिक्षा विभाग की ओर से समय-समय पर राज्य के छह विश्वविद्यालयों को आदेश दिये जाते रहे हैं. लेकिन इन आदेशों का कितना पालन होता है, यह छात्रों को हो रही परेशानी से ही पता चलता है.  बता दें कि 20 अप्रैल 2016 को कुलाधिपति की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय के कुलपतियों की बैठक हुई थी. जिसमें विश्वविद्यालयों को आदेश दिया गया था कि राज्य के सभी विश्वविद्यालयों की परीक्षा प्रक्रियाओं को पूर्णतया  डिजिटल किया जाये. लेकिन कुलाधिपति द्वारा आदेश दिये हुए तीन साल होने को हैं, राज्य का कोई भी विश्वविद्यालय पूर्णतः डिजिटल नहीं बन पाया है. परीक्षा प्रक्रियाओं की बात छोड़ दें तो विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों को वाईफाई तक नहीं मिल पाता. उक्त बैठक में उच्च शिक्षा के तत्कालीन प्रधान सचिव एसके सत्पथी भी उपस्थित थे.

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ऑनलाइन  कॉपियां उपलब्ध नहीं

राज्य के विश्वविद्यालयों में परीक्षा प्रक्रिया डिजीटल हो जाने से छात्रों को विशेष राहत मिलेगी. क्योंकि ऐसे में छात्रों को परीक्षा फॉर्म भरने से लेकर परिणाम पत्र तक ऑनलाइन उपलब्ध होंगे. खुद रांची विश्वविद्यालय के कुलपति‍ डॉ रमेश कुमार पांडे ने साल 2015 में कई बार घोषणा की कि वे रांची विश्वविद्यालय की परीक्षा की कॉपियों को ऑनलाइन उपलब्ध करायेंगे.  लेकिन कुलपति अपनी कही बात को भी पूरा नहीं कर सके. नतीजा यह  है कि छात्र इधर उधर भटकते नजर आते  हैं.  इस संबंध में नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलपति एसएन सिंह ने कहा कि राज्य में कहीं भी  ऑनलाइन  कॉपियां नहीं डाली जातीं. इसलिए नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय में भी नहीं डाली जाती.

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परीक्षा कैंलेडर जारी नहीं होता

बैठक में विश्वद्यिालयों को यह आदेश भी दिया गया था कि प्रत्येक सत्र के पूर्व  विश्वविद्यालय की ओर से परीक्षा कैलैंडर और रिजल्ट जारी होने की तिथि जारी कर दी जाये. लेकिन ऐसा किसी भी विश्वविद्यालय की ओर से नहीं किया जाता. कई छात्रों ने कहा कि जब विश्वविद्यालय समय पर परीक्षा नहीं ले नहीं पाते तो कैलेंडर का कोई महत्व नहीं.  राज्य के  छह विश्वविद्यालयों  को देखा जाये तो कहीं भी सत्र की परीक्षाएं समय पर नहीं ली जातीं और न ही रिजल्ट समय पर जारी किया जाता है.  रांची विश्वविद्यालय की बात की जाये तो यहां  प्रवेश परीक्षा तक समय पर नहीं ली जाती. छात्रों ने जानकारी दी कि देश के नामचीन विश्वविद्यालयों को देखा जाये तो हर जगह परीक्षा कैलैंडर निकाला जाता है. लेकिन इस राज्य में ऐसा नहीं होता.

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 ओएमआर सीट पर होती है सिर्फ एक पेपर की परीक्षा

विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया गया है कि सत्र की कोई भी एक परीक्षा ओएमआर सीट पर ली जाये. रांची विश्वविद्यालय, नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय, विनोबा भावे में परीक्षाएं ओएमआर सीट पर तो होती है. लेकिन वह भी सिर्फ एक विषय इनवायरमेंटल साइंस की ली जाती है.  कई छात्रों से पूछने से जानकारी हुई कि कई छोटे  कालेजों में तो ओएमआर सीट पर  किसी भी विषय की परीक्षा नहीं होती. जबकि कुलाधिपति ने यह आदेश दिया है.  वहीं सिद्धो कान्हो मुर्मू विश्वविद्यालय के छात्रों ने बताया कि यहां ओएमआर सीट पर एक भी परीक्षा नहीं होती.

 कुलपति सही से जानकारी नहीं देते !

इस संबध में छह विश्वविद्यायों के कुलपतियों से जानकारी लेने की कोशिश गयी.  जिसमें नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलपति एसएन सिंह ने कहा कि डिजिटल प्रोसेस का मतलब क्या है. जितना बाकी विश्वविद्यालयों में होता है उतना यहां भी है. ऑनलाइन पेपर उपलब्ध नहीं है. एडमिट कार्ड उपलब्ध करा ही दिया जा रहा है. ऐसे में इसका कोई मतलब नहीं. वहीं कोल्हान विश्वविद्याल की कुलपति  डॉ शुक्ला मोहंती ने कहा कि इस संबध में कोई जानकारी नहीं है. परीक्षा नियंत्रक को जानकारी होगी.  डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एसएन मुंडा ने कहा कि बात समझ में नहीं आ रही. जब इन्हें दुबारा फोन लगाया गया तो इन्होंने जवाब ही नहीं दिया.

कुलपति फोन नहीं उठाते !

चांसलर पोर्टल और राज्य सरकार के फोन बुक में सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के नंबर दिये गये हैं. लेकिन रांची विश्वविद्यालय, सिद्धो कान्हो मुर्मू विश्वविद्यालय के कुलपति फोन ही नहीं उठाते हैं.

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