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उत्तराखंड हाई कोर्ट ने कहा, किसी भी जाति का व्यक्ति बन सकता है मंदिर का पुजारी

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Nainital : उत्तराखंड हाई कोर्ट ने गुरुवार को कहा है कि योग्यता पूरी करने वाला किसी भी जाति का व्यक्ति मंदिर का पुजारी बन सकता है और मंदिर में नियुक्त ऊंची जाति का कोई पुजारी अनुसूचित जाति या जनजाति के किसी भक्त को पूजा करने से रोक नहीं सकता. हाईकोर्ट की डिविजन बेंच के जस्टिस लोकपाल सिंह और राजीव शर्मा ने कहा कि पूरे राज्य के उच्च जाति के पुजारी एससी/एसटी समुदाय से आने वाले लोगों को पूजा, धार्मिक समारोह या अनुष्ठान करने के लिए किसी भी कीमत पर मना नहीं करेंगे.

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अदालत ने यह आदेश अनुसूचित जाति और जनजातियों के व्यक्तियों के मंदिरों में जाने और धार्मिक गतिविधियों के अधिकारों से संबंधित 2016 में दाखिल एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिये.अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 जुलाई की तारीख नियत करते हुए गढ़वाल आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद रहने के भी निर्देश दिये. याचिका में कहा गया है कि हरिद्वार में ऊंची जातिवाले पुजारी निचली जातिवाले भक्तों से भेदभाव करते हैं और उनकी तरफ से धार्मिक गतिविधियां करने से मना करते हैं.

अदालत ने ऊंची जाति वाले पुजारियों से सभी मंदिरों में निचली जातियों के सदस्यों की तरफ से पूजा समारोह कराने से इनकार न करने के निर्देश दिये. हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पूरे प्रदेश में किसी भी जाति से संबंधित सभी व्यक्तियों को बिना किसी भेदभाव के मंदिर में जाने की अनुमति है और सही तरीके से प्रशिक्षित और योग्य किसी भी जाति का व्यक्ति मंदिरों में पुजारी हो सकता है.

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