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कभी असंगठित मजदूरों पर मेहरबान थी राज्य सरकार, लगायी थी वायदों की झड़ी

राज्य में 12 लाख 7 हजार निबंधित मजदूर हैं

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  • हाल असंगठित कर्मकार समाजिक सुरक्षा योजना का
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Ranchi: राज्य में योजनाओं का धरातल में नहीं उतरना आम बात है. साल 2014 में झारखंड असंगठित कर्मकार समाजिक सुरक्षा योजना लागू की गयी. इसके तहत सभी क्षेत्रों के असंगठित मजदूरों का निबंधन करना था, जिनकी उम्र 18 से 59 वर्ष हो. निबंधन के बाद मजदूरों को विभिन्न सुविधाएं मिलनी थीं. जिसमें स्वास्थ्य सुविधाएं,  बच्चों को छात्रवृत्ति,  अंत्योष्टि सहायता राशि आदि देने की घोषणा की गयी थी. अब हाल ये है कि मजदूरों का निबंधन तो हो रहा है, लेकिन सुविधाएं नहीं मिल रहीं.

लगाना पड़ता है कार्यालयों के चक्कर 

निबंधित मजदूरों से श्रम विभाग की ओर से मिलने वाली सुविधाओं के लिए जब पूछा गया तो अधितर   ने बताया कि उन्हें कोई सुविधा नहीं मिली. मांडर प्रखंड अंतर्गत नारो गांव निवासी अमला खलखो ने जानकारी दी कि उन्हें श्रम विभाग की ओर से पहचान पत्र दिया गया है. लेकिन जो सुविधाएं उन्हें मिलनी चाहिये,  वो उन्हें नहीं मिलती. उन्होंने बताया कि पहचान पत्र लेकर अस्पताल जाने से इलाज नहीं होता, बल्कि इलाज के लिए  पैसे देने पड़ते हैं. वृद्धा एलिसबा एक्का ने जानकारी दी कि मजदूरी करते उनका जीवन बीत गया. श्रम विभाग की ओर से निबंधन कराये उनको पांच साल होने जा रहा है. अब जब वह स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए पहचान पत्र लेकर अस्पताल जाती हैं, तो उन्हें कोई सुविधाएं नहीं मिलती.

एक साल हो गया, नहीं मिला कार्ड

मांडर प्रखंड कुरकुरामंदरो गांव के उमेश गिरी ने एक साल पहले निबंधन के लिए फार्म भरा. लेकिन अब तक उन्हें पहचान पत्र नहीं दिया गया. उन्होंने कहा कि बार-बार विभाग जाते हैं, लेकिन अधिकारी कुछ न कुछ बहाना बनाकर पहचान पत्र नहीं दे रहे.

क्या -क्या सुविधाएं मिलनी हैं

निबंधित मजदूर की मौत होने पर उसके आश्रित को एक लाख रुपया, दुर्घटना में दो अंग भंग होने पर 75000, एक अंग भंग होने पर 37000 सरकार की ओर से मिलने का प्रावधान है. इसी तरह कक्षा नौ से उच्च शिक्षा  तक के मजदूरों के बच्चों को दो किस्तों में सालाना छात्रवृत्ति 1200,  अस्पताल में भर्ती होने पर 5000 रुपये की सहायता और झारखंड मुख्यमंत्री असंगठित कर्मकार आवास सहायता योजना आदि की सुविधाएं मिलनी थी.

12 लाख 7 हजार मजदूरों का हो चुका है निबंधन

श्रम विभाग की ओर से अब तक 12 लाख 7 हजार मजूदरों का निबंधन हो चुका है. संयुक्त श्रमायुक्त अजित कुमार पन्ना ने जानकारी दी कि निबंधन के बाद पहचान पत्र मजदूरों को दिया जाता है. जिससे सारी सुविधाएं मजूदरों को मिलती हैं. स्वास्थ्य हो या अंत्योष्टि राशि, सभी सुविधाएं मजदूरों को मिलती हैं. राजधानी में 33,773 मजदूरों का निबंधन किया जा चुका है. उन्होंने बताया कि निबंधन के बाद मजदूरों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत अस्पतालों में इलाज कराना है.

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