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#ODF झारखंड का सच : कागजों पर #Toilet निर्माण दिखा राशि भी कर दी खर्च, जमीन पर सिर्फ गड्ढे और अधूरी दीवारें

क्या झारखंड पूरी तरह बना ओडीएफ? सरकार का दावा कितना सच? खूंटी जिला का फैक्ट चेक, वीडियो देखें, क्या कहते हैं ग्रामीण.

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Pravin kumar 

Ranchi : महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को ‘ओडीएफ़’ देश घोषित किया.

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भारत सरकार के पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय के ‘स्वच्छ भारत मिशन’ की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार 2 अक्तूबर 2014 से लेकर अब तक देश में 10,07,51,312 (10 करोड़ से ज़्यादा) टॉयलेट बनाये गये हैं.

इसमें झारखंड में 42,18,560 शौचालय निर्माण का दावा किया गया है. जबकि खूंटी जिले के छह प्रखंड अड़की, कर्रा, रनिया, तोरपा, खूंटी और मुरहू प्रखंड में कुल 82 हजार 52 सरकारी शौचालय बनाने के अधिकारिक आकड़े हैं.

इस इलाके से झारखंड सरकार ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री नीलकठ सिंह मुंडा का विधानसभा क्षेत्र भी पड़ता है, जबकि सरकारी योजनाओं के संचालन का जिम्मा राज्य के युवा आइएएस सूरज कुमार का है.

सरकारी दावे के अनुसार खूंटी जिला बीते दो वर्षों से ओडीएफ़ श्रेणी में शामिल हैं. जबकि जिले में सैकड़ो शौचालय के गड्ढे खुदे नजर आते है और वहां शैचालय का निर्माण नही किया गया है.

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खूंटी जिले के मुरहू प्रखंड में कुल 16 ग्राम पंचायत हैं.

इसमें इंदपीड़ी पंचायत के गांव की फैक्ट चेकिंग के तथ्य सामने आये कि शौचालय का निर्माण ही नही किया गया है जबकि सरकारी आकड़ों में शौचालय निर्माण की राशि खर्च कर, निर्माण दिखा दिया गया है.

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इंदपीड़ी पंचायत

इंदपीड़ी पंचायत के ग्रामीण खुले में शौच जाते हैं. शौचालय के नाम सिर्फ खानापूर्ति हुई है.

पंचायत में 2 अक्तूबर 2014 से लेकर अब तक कुल 832 शौचालय बनाने का दावा किया गया. इसके लिए प्रति शौचालय 12 हजार रुपये की राशि भी पंचायत को उपलब्ध करायी गयी.

पंचायत के तापीगसेरा गांव के विरसा कड़िर कहते हैं, गांव में शौचालय का निर्माण आधा अधूरा पड़ा है. शौचालय के नाम पर सिर्फ गड्ढे किये गये. गांव के करीब 40 परिवारों का शौचालय पूरा नहीं हुआ है.

कुछेक को छोड़कर गांव में सभी का शौचालय आधा-अधूरा पड़ा हुआ है. ग्रामीण खुले में शौच जाते हैं.

पंचायत के मुखिया द्वारा सभी को शौचालय के लिए गड्ढा खोदने के लिए श्रमदान करने को कहा गया, नहीं करने पर राशन बंद होने की चेतावनी दी गयी.

पंचायत के अधिकांश गांवों में शौचालय अधूरे पड़े हैं. गांव के एक मिस्त्री जिन्होंने शौचालय निर्माण किया था उनके 13 शौचालयों का पैसा भी पंचायत द्वारा नही दिया गया है.

मुखिया से कहने पर कहते हैं कि काम शुरू होगा तब पैसा मिलेगा जबकि शौचालय निर्माण की राशि निकाल दी गयी है और शौचालय कागजों में पूर्ण दिखाया गया है.

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केवड़ा पंचायत

पंचायत में 2 अक्तूबर 2014 से लेकर अब तक कुल 531 शौचालय बनाने का दावा किया गया. इसके लिए प्रति शौचालय 12 हजार रुपये की राशि भी पंचायत को उपलब्ध करायी गयी.

केवड़ा पंचायत के सेनागुटू गांव में 28 परिवार रहते हैं. ग्रामीण प्रदीप कांडीर कहते हैं- शौचालय के नाम पर ग्रामीणों को तीन-तीन बोरा सीमेंट, ईंट और बालू दिये गये.

इससे जितना कम किया जाना था ग्रामीणों ने किया. गांव के लोग शौचालय का प्रयोग नहीं करते, क्योंकि ग्रामीणों का शौचालय बना ही नहीं. बरसात के समय में सांप-बिच्छू का खतरा बना रहता है.

पंचायत के पूर्व मुखिया पौलूस कांडीर कहते हैं- पंचायत में शौचालय निर्माण के नाम पर सिर्फ घोटाला ही हुआ है. यह सिर्फ इस पंचायत में नही, बल्कि प्रखंड के सभी पंचायतों का कमोबेश ऐसा ही हाल है.

मेरे गांव में किसी का भी शौचालय पूरा नहीं हुआ है. पंचायत को ओडीएफ घोषित कर दिया गया है. इलाके में पानी की समस्या है. ऐसे में पूर्व की भांति ही ग्रामीण खुले में शौच जाते हैं.

जिले के अधिकारी अगर गांव का भ्रमण करें तो उन्हें ओडीएफ की सच्चाई पता चल जायेगी या फिर अधिकारी जान-बुझ कर घोटाला करने वाले को बचा रहे हैं.

कोडापूर्ती पंचायत

पंचायत में 2 अक्तूबर 2014 से लेकर अब तक कुल 731 शौचालय बनाने का दावा किया गया. इसके लिए प्रति शौचालय 12 हजार रुपये की राशि भी पंचायत को उपलब्ध कराया गया.

कोडापूर्ती गांव के टोला गांडूंग में कुल 36 परिवार रहते हैं. किन्हीं का शैचालय पूरा नहीं हुआ. ग्रामीण फागुआ मुंडा कहते हैं- शौचालय के नाम पर सिर्फ ढांचा तैयार हुआ है. जब यह पूछा गया कि आपलोग खुले में शौच जाते हैं तो कहते है- हां गांव में किसी का शौचालय बना ही नहीं. जब कहा गया कि अपका जिला ओडीएफ है, तो कहते हैं- कागजों में साहेब लोग कुछ भी कर सकते हैं.

पंचायत के जिलिंगकेल गांव में 78 परिवार रहते हैं गांव के खड़िया सोय कहते हैं- गांव में सभी शौचालय अधूरे हैं. क्या पता कैसे सरकार ने खुले में शौच से मुक्त पंचायत घोषित कर दिया है.

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झारखंड में कितने शौचालय निर्माण का है सरकारी दावा, देखें नीचे : 

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