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DMC में ODF के दावे की सच्चाई, देखिये मेयर साहब हो रही जग हंसाई

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Dhanbad: नगर निगम ने पूरे शहरी इलाके को पिछले साल 2 अक्टूबर को ही ओडीएफ घोषित कर दिया है. यानी खुले में शौच मुक्त. लेकिन  धनबाद शहर के बीचोबीच एक दलित बस्ती के लोग आज भी शौचालय और पानी के अभाव में खुले में शौच जाने को विवश हैं. यहां आकर मेयर ने तिरंगा जरूर फहराया था,  लेकिन इनकी परेशानियों को नही समझा. आज स्थिति इतनी बदहाल है कि पानी के अभाव में जो कुछ शौचालय बने भी हैं, वो इस्तेमाल में नही हैं.

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चारों ओर है गंदगी का अंबार 

जर्जर शौचलय, जहां-तहां कूड़े का अंबार, टूटी-फूटी बजबजाती नालियां और सूखे हुए सरकारी नल- ये नजारा जिला मुख्यालय और धनबाद नगर निगम कार्यालय से महज़ तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित धैया कोरंगा दलिल बस्ती व मंडल बस्ती का है. इस बस्ती में दो हजार से ज्यादा परिवार रहते हैं. कुछ लोगों को शौचालय का लाभ दिया गया, लेकिन उनको राशि की एक ही किस्त मिली. इससे इन लोगो ने शौचालय को अधूरा छोड़ दिया. कुछ लोगों ने शौचालय तो बनाया लेकिन पानी के अभाव में इस्तेमाल नही कर पाते हैं. न निगम वाले कूड़े का उठाव  हैं न ही नालियों की साफ-सफाई होती है. पानी की समस्या इतनी विकराल है कि लोग खरीद कर पानी पीने को विवश हैं. निगम की तरफ से लगायी गयी पानी की पाइप लाइन कई माह पहले ही दम तोड़ चुकी है. अब स्थिति यह है कि क्या महिला, क्या बड़े और क्या बच्चे सभी को खुले में शौच जाना पड़ता है.

प्रशासन से लगा चुके हैं कई बार गुहार 

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ऐसा नही है कि लोगों ने यहां की समस्याओं को लेकर आवाज नही उठायी है. मेयर से लेकर नगर आयुक्त और डीसी तक फरियाद की गयी. लेकिन नतीजा सिफर रहा है. यहं के लोगों ने सालों निगम कार्यालय के चक्कर लगाये, लेकिन इससे कोई लाभ नहीं मिला. बता दें कि ये लोग दूसरे के घरों में साफ़-सफायी और मजदूरी कर परिवार वालों का भरण पोषण करते हैं. शहर की वीआईपी कॉलोनियों की तरह इन्हें सुख-सुविधा नसीब नहीं है. दर्जनों परिवार आशियाने के अभाव में झोंपड़ी में गुजारा करने को मजबूर हैं. लेकिन उन्हें   आवास योजना का लाभ नही मिला.  दूसरी ओर शौचालय के अभाव में दर्जनों दलित और पिछड़ी जाति के महिलाएं और पुरुष अभी भी खुले में शौच जाने को विवश हैं. इन्हें सांसद, विधायक, मेयर और स्थानीय पार्षद सरीखे जनप्रतिनिधियों ने भी खूब बेवकूफ बनाया है.

इस मामले में जब मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल से सम्पर्क किया गया तो उन्होंने रांची में होने का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ लिया. जबकि नगर आयुक्त मीटिंग में व्यस्त हैं.

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