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नर्सिंग कॉलेज का सच, हर सर्टिफिकेट के लिए छात्राओं से होती है वसूली !

कल्याण विभाग का झांसा देकर कॉलेज छात्रों का लेते हैं नामांकन

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Ranchi: झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राएं इंटर पास कर ज्यादात्तर नर्सिंग क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहती हैं. राज्य में सरकारी नर्सिंग कॉलेजों की संख्या काफी कम है, इसलिए झारखंड सरकार के कल्याण विभाग की ओर से राज्य के इन गरीब छात्रों नर्सिंग कोर्स पढ़ाने के लिए छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है. ताकि ये छात्राएं नर्सिंग का कोर्स कर आत्मनिर्भर बन सकें.

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राज्य में बड़ी संख्या में निजी नर्सिंग कॉलेज ग्रामीण छात्रों का नामांकन इसी तर्ज पर लेते है कि सरकार द्वारा उन्हें छात्रों के फीस का भुगतान कर दिया जायेगा. एडमिशन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद इन नर्सिंग कॉलेजों द्वारा छात्राओं को दोहन शुरु हो जाता है. नामांकन के बाद छात्रों से कल्याण विभाग का ऑनलाइन छात्रवृत्ति फॉर्म भरने के लिए दो हजार से पांच हजार रूपये तक वसूली इन संस्थानों द्वारा की जाती है.

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इतना ही नहीं, कल्याण राशि के आवंटन के एवज में संस्थानों द्वारा इतना ही राशि की वसूली की जाती है. हर प्रमाण-पत्र जारी करने के एवज में इन छात्रों से पांच सौ से हजार रुपये तक की वसूली भी इन निजी नर्सिंग कॉलेजों द्वारा की जाती है. मामला यहीं नहीं थमता है जब ये छात्राएं नर्सिंग की डिग्री लेकर मूल प्रमाण-पत्र एवं अन्य राज्यों में नौकरी हेतु एनओसी के लिए रिम्स स्थित स्टेट नर्सिंग काउंसिल झारखंड में जाती हैं तो उनसे इसके एवज में काउंसिल के कर्मचारियों द्वारा पैसे की मांग की जाती है.

कल्याण विभाग का झांसा देकर कॉलेज छात्रों का लेते हैं नामांकन

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निजी नर्सिंग कॉलेज, राज्य के एससी एवं एसटी छात्रों का नामांकन यह बोल कर लेते हैं कि सरकार उन्हें मुफ्त में नर्सिंग कोर्स करा रही. इसकी फीस सरकार निजी कॉलेजों को छात्रवृत्ति के माध्यम से देती है. नामांकन के दौरान पूरी मार्केटिंग इसी बात पर इन संस्थानों द्वारा कर सीटें पूरी तरह से भरी जाती है. लेकिन जैसे ही इन नर्सिंग कॉलेजों के सीट भर जाते हैं. इसके बाद इन संस्थानों द्वारा तरह से तरह फीस की नाम पर बड़ी रकम इनसे वसूली जाती है.

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क्या कहती हैं नर्सिंग की छात्राएं

शशिकला, पटना- बोकारो के बीजीएच से नर्सिंग की पढ़ाई करने बाद मुझे पटना में स्वास्थ्य विभाग में नौकरी मिली लेकिन स्टेट नर्सिंग काउंसिल द्वारा एनओसी देने के एवज में हर कर्मचारी को पांच-पांच सौ रुपये देने पड़े.
नीतू मिंज, खूंटी- बीएससी नर्सिंग कोर्स में शाइन नर्सिंग कॉलेज में नामांकन लिया. नामांकन के दौरान संस्थान ने बताया कि एससी एवं एसटी छात्रों का नामांकन कॉलेज फीस माफ कर देती है. लेकिन नामांकन के बाद कई प्रकार के फीस कॉलेज द्वारा वसूला गया.

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