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झारखंड में साझा संस्कृति की परंपरा पुरानी: हफीजुल हसन

रांची प्रेस क्लब में दो दिनी कविता संवाद शिविर का आगाज़

Ranchi : राज्य के कला-संस्कृति मंत्री हफीजुल हसन ने कहा कि झारखंड में साझा संस्कृति की पुरानी परंपरा रही है. यहां के साहित्य में मानवीयता का पक्ष धवल रहा है, लेकिन कुछ लोग इसे मटियामेट करने की साज़िश में लगे हैं, लेकिन वे कभी कामयाब नहीं हो सकते. मंत्री आज रांची प्रेस क्लब में दो दिवसीय कविता संवाद शिविर के उद्घाटन अवसर पर बहैसियत मुख्य अतिथि बोल रहे थे. ‘कविता भीड़ में बौखलाये आदमी का हलफनामा है’ के मुख्य टैग के साथ कार्यक्रम का आगाज़ हुआ. दैनिक नव प्रत्यूष बिहार, न्यूज़ विंग और जुटान की ओर से आयोजन किया गया है.
पहले सत्र के विषय ‘झारखंड में कविता की ज़मीन’ पर बोलते हुए समीक्षक मिथिलेश कुमार सिंह ने कहा कि कविता ज़िन्दगी की जद्दोजहद में साथ देने वाला हथियार है. वो समुंदर है. जंगल है. पहाड़ है.

सबकुछ हो जाने के बावजूद थोड़ी सी आग और धुआं बचा हुआ है. जबकि गुंजन सिन्हा बोले कि उन्हें आदिवासी जीवन को क़रीब से देखने का मौक़ा मिला. लेकिन आज साहित्य और कविता इस समाज के साथ न्याय नहीं कर रहा है. कवि अश्विनी कुमार का कहना था कि झारखंड में कई भाषाएं हैं. ये भाषाओं का भी जंगल है. क्या ये जंगल भी कट जायेंगे. संचालन संजय झा ने किया.

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कार्यक्रम के दौरान न्यूजविंग के प्रबंध निदेशक विपिन सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता अनु पोद्दार, विपश्यना प्रशिक्षक कविता झा एवं अनिता यादव को अलग-अलग क्षेत्र में सराहनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया.

रविवार को झारखंड की पत्रकारिता और आदिवासी सवाल के अलावा झारखंड का सिनेमा उसकी संभावनाएं विषय पर परिचर्चा होगी.

मौके पर शिल्पी चौधरी, संगीता अग्रवाल और एजाज़ अनवर आदि कवियों ने कविता पाठ भी किया. कार्यक्रम में विधायक राजेश कच्छप, शम्भुनाथ चौधरी, मधुकर, संजय सिंह, अजय, शहरोज़ कमर, सुनील बादल, शिल्पी कुमारी, अक्षय कुमार और अशोक गोप समेत कई प्रमुख लोग शरीक हुए.

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