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पहली और दूसरी लहर की अपेक्षा कम खतरनाक होगी कोरोना की तीसरी लहर, बच्चों पर नहीं होगा कोई असर

Anita Gupta

Ranchi : पिछले तीन महीने से कोरोना के रफ्तार में लगातार हो रही गिरावट से एक तरफ जहां लोग राहत महसूस कर रहें हैं तो वहीं दूसरी तरफ उन्हें कोरोना की तीसरी लहर की चिंता भी सता रही है. वे डरे हुए हैं कि कहीं तीसरी लहर, पहली और दूसरी लहर से ज्यादा खतरनाक ना हो जाएं. खासकर तीसरी लहर में बड़ी संख्या में बच्चों के चपेट में आने की चर्चा से.

 

ऐसी कई आशंकाओं के बीच विशेषज्ञों की ओर से एक राहत भरी खबर आई है, जो कि लोगों के लिए बड़ा ही सुकून देने वाला है. विशेषज्ञों के अनुसार कोरोना की तीसरी लहर ज्यादा घातक सिद्ध नहीं होगी. पहली और दूसरी लहर की अपेक्षा उसका प्रभाव कम होगा. ऐसे में ज्यादा लोग संक्रमित नहीं होंगे और होंगे भी तो उनकी स्थिति ज्यादा गंभीर नहीं होगी.

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कोरोना की तीसरी लहर क्यों ज्यादा खतरनाक नहीं होगी

  1. देश के अधिकतर क्षेत्रों में हर्ड एम्युनिटी डेवलप होने के कारण तीसरी लहर लोगों पर ज्यादा प्रभाव नहीं डालेगा – डॉ तुषार कुमार

रिम्स के एन्थेसिया एंड ट्रामा सेंटर के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ तुषार कुमार ने बताया कि कोरोना की पहली और दूसरी लहर के दौरान देखा जाए तो  हर  क्षेत्र के अधिकतर लोग संक्रमित हो चुके हैं. देश के 70 प्रतिशत लोगों ने कोविड का पहला डोज और 19 प्रतिशत लोगों ने वैक्सीन का दूसरा डोज भी ले लिया है. इसके कारण अधिकतर लोगों में एंटीबॉडी और एम्युनिटी डेवलप हो चुकी है. इसके कारण देश के अधिकतर क्षेत्रों में हर्ड एम्युनिटी डेवलप हो चुकी है. इस दौरान अगर तीसरी लहर आती भी है तो वो ज्यादा लोगो को संक्रमित नहीं कर पायेगी. अगर लोग संक्रमित भी होते है तो उन पर संक्रमण का ज्यादा प्रभाव नही पड़ेगा और ना ही उनकी स्थिति गंभीर होगी.

  1. जब तक कोई नया स्ट्रेन नहीं आता, तब तक कोरोना की तीसरी लहर नहीं आ सकती है- डॉ देवेश

रिम्स के पीएसएम विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर और कोविड एक्सपर्ट डॉ देवेश कुमार ने बताया कि कोरोना का जब तक कोई नया स्ट्रेन नहीं आता, तब तक कोरोना की तीसरी लहर नही आ सकती है.अगर तीसरी लहर आती भी है तो वह ज्यादा प्रभावशाली नही होगी और ना ही छोटे बच्चों को कोई नुकसान होगा.

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बच्चों पर क्यों नहीं होगा कोरोना का असर

बच्चों के लंग्स में बड़ों की तुलना में रिसेप्टर बहुत छोटा होता है, जो ना के बराबर होता है. इसके कारण कोरोना वायरस जब बच्चे के शरीर में प्रवेश करता है तब वह उसके लंग्स पर कोई प्रभाव नहीं डाल पाता. ऐसे में बच्चे को हल्की सर्दी खांसी होती है और वह 2-3 दिनों में ठीक हो जाता है. वही दूसरी ओर बड़ों में रिसेप्टर होने के कारण कोरोना उनपर ज्यादा प्रभाव डालता है. इसके कारण बड़ों के लंग्स संक्रमित हो जाते हैं.

 

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