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उम्मीदवारों की परीक्षा में फेल हुआ सिस्टम: जिस एजेंसी को 2016 में करना था ब्लैक लिस्टेड,उसी एजेंसी ने ली 2017 में परीक्षा

Chhaya

Ranchi : 2016 में ऊर्जा विकास निगम की ओर से ली गयी इलेक्ट्रिक एग्जीक्यूटिव इंजीनियर नियुक्ति परीक्षा में भारी गड़बड़ी हुई थी. इस गड़बड़ी की जांच दो कमेटियों ने की थी. दूसरी कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए स्पष्ट कहा था कि परीक्षा लेने वाली एजेंसी मेसर्स आईपीपी की ओर से लापरवाही बरती गयी है. इस एजेंसी को ब्लैक लिस्टेड किया जाना चाहिये.

जांच एजेंसी के रिकमंडेशन के बाद भी ऊर्जा विकास निगम की ओर से एजेंसी को ब्लैक लिस्टेड नहीं किया गया. आलम यह रहा है कि जिस कंपनी को साल 2016 में ही ब्लैक लिस्टेड करना था,उसी एजेंसी ने साल 2017 में फिर से निगम में तकनीकी पदों के लिए परीक्षा ली. बतातें चले कि साल 2016 में 1086 पदों के लिये परीक्षा ली गयी थी. परीक्षा में गड़बड़ी होने के बाद परीक्षार्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. जिसके बाद उक्त बहाली पर कोर्ट ने स्टे लगाया. बिजली बोर्ड की ओर से इसके बाद फिर से 2017 में उक्त पदों के लिये बहाली निकाली गयी.

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ऊर्जा विकास निगम कर सकती थी ब्लैक लिस्टेड

दूसरी जांच कमेटी की ओर से 16 दिसंबर 2016 को जांच रिपोर्ट पेश की गयी. उसमें तत्कालीन एमडी जेयूएसएनएल मंजूनाथ भजंत्री, निगरानी एडीजीपी ए. नटराजन, ईआइसी जेबीवीएनएल सीडी कुमार और एफसी जूयूएसएनएल प्रमोद कुमार शामिल थे. ऐसे में जांच कमेटी के रिपोर्ट में परीक्षा में गड़बड़ी की बात आने से ऊर्जा विकास निगम एजेंसी को ब्लैक लिस्टेड कर सकती थी. पर निगम ने ऐसा नहीं किया.

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ऐसे हुई थी परीक्षा में गड़बड़ी

कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि डोरंडा कॉलेज में प्रश्नपत्र लीक हुआ. जबकि इस केंद्र में खुद ऊर्जा निगम के अधिकारी मौजूद रहे. पेपर लीक मामले में एजेंसी की संलिप्तता को नाकारा नहीं जा सकता. वहीं परीक्षा आयोजित करने वाली ऊर्जा विकास निगम के अधिकारियों की संलिप्तता की पुष्टि नहीं की गयी. कमेटी ने जांच में पाया कि व्हाट्सएप में पेपर लीक हुआ था. तत्कालीन डोरंडा कॉलेज के प्राचार्य ने कुछ छात्रों को परीक्षा से निष्कासित भी किया था. वहीं कुछ परीक्षार्थियों ने कमेटी को गवाही दी कि 45 मिनट देर तक परीक्षार्थी केंद्र में पहुंचे और उन्होंने परीक्षा भी दी. कुछ परीक्षार्थियों ने यह भी बताया कि जिस होटल में एजेंसी के अधिकारी रूके थे. वहां कुछ परीक्षार्थी भी रूके थे. एजेंसी के अधिकारियों के पास प्रश्न पत्र भी थे. ऐसे में कमेटी ने माना कि एजेंसी की ओर से लापरवाही बरती गयी. लेकिन पेपर लीक होने में ऊर्जा विकास निगम के किसी अधिकारी पर आरोप सिद्ध नहीं हुआ.

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