NEWSWING
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

दागी नेताओं के चुनाव पर रोक लगाने पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, कानून बनाने का काम संसद का है   

सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारों के बटंवारे के संदर्भ में कहा कि कानून बनाने का काम संसद का है.

80
mbbs_add

NewDelhi : सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारों के बटंवारे के संदर्भ में कहा कि कानून बनाने का काम संसद का है. कोर्ट को लक्ष्मण रेखा नहीं पार करनी चाहिए. कोर्ट ने यह टिप्पणी गंभीर आपराधिक मामलों के आरोपी नेताओं को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए दाखिल याचिका पर सुनवाई के क्रम में कही. बता दें कि याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से  आग्रह किया था कि  आरोपी नेताओं को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए कानूनी प्रावधान किया जाये.

सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली संवैधानिक बेंच ने कहा कि संसद का काम कानून बनाना है और हमारा काम कानून की व्याख्या करना है. अदालत कानून नहीं बना सकती. यह संसद के अधिकार क्षेत्र में है. कहा कि दागी नेताओं के खिलाफ मामले फास्ट ट्रैक किये जा सकते है.

कोई भी आदमी तब तक निर्दोष है, जब तक कि कोर्ट उसे सजा नहीं दे देती

इस याचिका का विरोध केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने किया. अटॉर्नी जनरल ने कहा कि यह मुद्दा पूरी तरह से संसद के अधिकार क्षेत्र में है. दलील देते हुए कहा कि जहां तक सजा से पूर्व  चुनाव लड़ने पर बैन का सवाल है तो कोई भी आदमी तब तक निर्दोष है, जब तक कि कोर्ट उसे सजा नहीं दे देती.  उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक प्रावधान का जिक्र करते हुए याद दिलाया कि मंत्री जब शपथ लेते हैं तो संविधान को अक्षुण्ण रखने की बात करते हैं तो क्या कोई आदमी जिसके खिलाफ मर्डर का चार्ज है वह ऐसा कर सकता है? इस पर अटॉर्नी जनरल का जवाब था कि शपथ में ऐसा कुछ भी नहीं है कि जिनके खिलाफ केस चल रहा है वह ऐसा नहीं कर सकता.

इसे भी पढ़ें- सरकार के दबाव में न झुकें मीडिया मालिक, एडिटर्स गिल्ड ने की अपील

लोकतंत्र को बचाने के लिए कानून जरूरी है

Hair_club

सीजेआई ने कहा कि किसी को दोषी करार दिये जाने पर वह अयोग्य हो जाता है. कहा कि भ्रष्टाचार संज्ञा है ,लेकिन जैसे ही राजनीति में प्रवेश करता है वह क्रिया बन जाता है. इसके बाद कोई भी एंटीबॉयोटिक काम नहीं करती. इस पर याचिकाकर्ता के वकील दिनेश द्विवेदी ने जवाब दिया कि तब ज्यादा डोज देना जरूरी होता है. सीजेआई ने  द्विवेदी  की दलील से सहमत होते हुए कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए कानून जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट है कि यह विधायिका की ड्यूटी है कि वह नागरिक की आवाज सुने. आज अगर लोग चाहते हैं कि ऐसे लोग चुनाव न लड़ें तो इसे रिट से कैसे रोका जा सकता है.  द्विवेदी ने इस पर कहा लेकिन कानून तोड़ने वाले कानून नहीं बना सकते.

दिनेश द्विवेदी ने पूछा कि साल 2014 में 34 फीसदी ऐसे लोग जीत कर संसद आये, जिनके खिलाफ क्रिमिनल केस है. क्या कानून तोड़ने वाले कानून बना सकते हैं? द्विवेदी ने कहा कि राजनीति में अपराधिकरण लोकतंत्र के लिए स्वीकार्य नहीं है. उनकी बात पर जस्टिस रोहिंटन नरिमन ने कहा कि आपका कहने का मतलब है कि हम तमाम नागरिकों के अधिकार को सेफगार्ड करें? लेकिन इसकी एक लक्ष्मण रेखा है. संसद कानून बनाती है और हम उनकी व्याख्या करते हैं.

राजनीतिक पार्टी ऐसे लोगों को चुनाव लड़ने की इजाजत न दे जिनके खिलाफ केस है

एक अन्य याचिकाकर्ता की ओर पेश वकील कृष्णन वेणुगोपाल ने कहा कि कोर्ट को आदेश पारित करना चाहिए कि राजनीतिक पार्टी ऐसे लोगों को चुनाव लड़ने की इजाजत न दे जिनके खिलाफ केस है. चुनाव आयोग राजनीतिक पार्टी का रजिस्ट्रेशन करती है और वह कह सकती है कि ऐसे लोगों को पार्टी चुनाव लड़ने की इजाजत न दे. चीफ जस्टिस ने कहा कि क्या कोर्ट ऐसा आदेश पारित कर सकती है. स्वतंत्र उम्मीदवार के मामले में क्या होगा.

तब याची के वकील ने सुझाव दिया कि राजनीतिक पार्टी को कहा जा सकता है कि वह दागी स्वतंत्र उम्मीदवार की मदद लेने से बचें. दिनेश द्विवेदी ने दलील दी कि एक तरफ जहां अधिकारों के बंटवारे की बात है तो दूसरी तरफ संसदीय लोकतंत्र है. विशाखा मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले गाइडलाइंस जारी कर चुकी है. मामले में अगली सुनवाई मंगलवार को होगी.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

nilaai_add

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

bablu_singh

Comments are closed.