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सामाजिक संगठनों के संघर्ष ने केंद्र और राज्य सरकार को बैकफुट पर लाया: एस अली

लोकसभा और विधानसभा सीटों पर सामाजिक संगठनों की साझेदारी के लिए किया जाएगा आंदोलन

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Ranchi :  सत्ताधारी पार्टी हो या विपक्षी दल, सभी चुनाव को लेकर राजनीति कर रहे हैं. राज्य में कई बड़ी बड़ी घटनाएं हुई. जिसमें स्थानीय नीति, भूमि अधिग्रहण बिल, धार्मिक स्वतंत्रता, एससी-एसटी कानून, तीन तलाक, रोजगार आदि अनेक निर्णय सरकार ने लिया. तब विपक्षी पार्टियां चुप थीं. लेकिन अब जब चुनाव निकट है तो सभी सीट हासिल करने में लगे है. उक्त बातें आमया के अध्यक्ष एस अली ने कहा. वे आमया की केंद्रीय बैठक को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि सामाजिक संगठनों के संघर्ष का नतीजा है कि केंद्र और राज्य में सरकार को बैकफुट पर लाकर खड़ा कर दिया है. नहीं तो राजनीतिक पार्टियां अपने स्वार्थ से ही आगे आती हैं.

सामाजिक संगठनों को किया जा रहा नजर अंदाज

उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव निकट है. ऐसे में राजनीतिक पार्टियों को चाहिए कि जन मुद्दों पर संघर्ष कर रही सामाजिक संगठनों को नजर अंदाज न करें. विपक्षी दल गठबंधन कर किसी न किसी तरह सता हासिल करना चाहती है. ऐसे में गठबंधन दलों को चाहिए कि अपनी चुनावी एजेंडा स्पष्ट करते हुए राज्य के 14 लोकसभा में से दो और 81 विधानसभा में से 10 सीटें सामाजिक संगठनों को दें. लेकिन ऐसा हो नहीं रहा.

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संगठनों को एकजुट किया जाएगा आंदोलन

बैठक में सर्वसम्मित से निर्णय लिया गया कि चुनाव को लेकर सभी आदिवासी-मूलवासी संगठनों को एकजुट किया जाएगा. जिसके बाद चुनाव में भागीदारी को लेकर आंदोलन किया जाएगा. मौके पर जियाउद्दीन असांरी, मो. फुरकान, तनवीर आलम, एकराम हुसैन, नौशाद आलम, अफताब आलम, अबरार अहमद, मोइज अहमद, सालहे सइद, अब्दुल गफ्फार, नसीम असांरी, मंजूर आलम, मो. सइद समेत अन्य उपस्थित थे.

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