JharkhandJharkhand StoryNEWSRanchiTop Story

राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की कहानी: हॉस्पिटल से लेकर हॉस्टल भवन तक जर्जर

Ranchi: राज्य के सबसे बड़े हॉस्पिटल रिम्स में दूर-दराज के इलाकों से लोग इलाज के लिए पहुंचते है. वहीं यह मेडिकल कॉलेज हर साल बड़े-बड़े स्पेशलिस्ट डॉक्टर भी तैयार कर रहा है. फिर भी हॉस्पिटल की मेन बिल्डिंग से लेकर पुराने सभी हॉस्टल की हालत जर्जर हो चुकी है. इतना ही नहीं अब तो आए दिन यहां हादसे का डर भी सताता रहता है. इसे लेकर कई बार शिकायतें भी की गई है. इसके बावजूद रिम्स प्रबंधन का ध्यान हॉस्पिटल की बिल्डिंग पर नहीं है. जिससे साफ है कि प्रबंधन को किसी हादसे का इंतजार है. इसके बाद ही अधिकारियों की नींद खुलेगी.

मरीजों की जान पर आफत

हॉस्पिटल की मेन बिल्डिंग में हमेशा एक हजार मरीज एडमिट रहते है. अब बिल्डिंग की हालत तो जर्जर है ही. कई जगहों से बिल्डिंग गिरने लगी है. जबकि कुछ जगहों पर सीलिंग झड़ रही है. जिससे इलाज करा रहे मरीजों की जान पर आफत बनी हुई है. कई बार तो सीलिंग और छज्जा गिरने के कारण मरीज दुर्घटनाग्रस्त होने से बच गए.

Sanjeevani

इसे भी पढ़े: नेतरहाट फायरिंग रेंज को विस्तार नहीं देने पर केंद्रीय जनसंघर्ष समिति ने हेमंत सरकार का जताया आभार

टूटी रेलिंग हादसों को दे रहे दावत

सीढियों में लोहे की रेलिंग लगी है. पुरानी होने की वजह से इसमें लगे लकड़ी के हैंडल उखड़ गए. वहीं रेलिंग भी सड़कर कई जगह से टूट चुकी है. अब ये टूटे रेलिंग से जाने अनजाने लोग घायल हो रहे है. अगर ध्यान चूका तो सीधे इमरजेंसी में जाना पड़ सकता है.


हॉस्टल को लेकर लगातार कंप्लेन

हॉस्टल की समस्या को लेकर मेडिकोज लगातार वार्डन और रिम्स के डीन को कंप्लेन कर रहे है. छत्त, डैमेज दीवारे और वॉशरूम की खराब हालत से उन्हें हॉस्टल में रहने में परेशानी हो रही है. कई बार शॉर्ट सर्किट भी हो चुका है. जब कोई घटना होती है तो अधिकारी हॉस्टल विजिट कर सबकुछ दुरुस्त कराने का दावा भी करते है. इसके बाद सब ठंडे बस्ते में चला जाता है. बताते चलें कि कुछ दिन पहले ही हॉस्टल की बाउंड्री गिर गई थी. जिसमें मेडिकोज बाल-बाल बच गए थे.

जीबी की बैठक में टीम बनाने का आदेश

रिम्स जीबी की बैठक में बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट को टीम तैयार करने का आदेश दिया गया था. जिसमें कहा गया था कि यह टीम रिम्स में तैनात रहेगी और भवन का निरीक्षण करेगी. जहां कहीं भी गड़बड़ी होगी तो उसका तत्काल इस्टीमेट तैयार करते हुए रिपेयरिंग का काम कराया जाएगा. लेकिन आजतक टीम का ही गठन नहीं हो पाया है. अब यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला गया.

Related Articles

Back to top button