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विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण तो हो गया, लेकिन लोग वहां तक पहुंचेंगे कैसे!

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Ranchi: राज्य सरकार इतनी जल्दबाजी दिखा रही है कि किसी प्रोजेक्ट का काम बिना पूरा किये ही उसका उद्घाटन कर दे रही है. अभी सिर्फ स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा ही लगी है और इसका उद्घाटन कर दिया गया. न तो वहां जाने के लिए कोई रास्ता है और न ही आस-पास सौदंर्यीकरण किया गया है. सामान्यत: किसी योजना का उद्घाटन तब ही किया जाता है, जब इसका पूरा कार्य हो जाये. यह पहला मौका नहीं है जब आधे-अधूरे निर्माण का उद्घाटन करने में सरकार ने जल्दबाजी की हो.  इससे पहले भी जयपाल सिंह स्टेडियम के एक हिस्से में लगभग 38 करोड़ रुपये खर्च से निर्मित अटल स्मृति वेंडर मार्केट का उद्घाटन भी रघुवर सरकार ने काम पूरा होने से पहले ही कर दिया. सरकार इस वेंडर मार्केट में अबतक फुटपाथ दुकानदारों को बसाने में सफल नहीं हो सकी है. करोड़ो की लागत से बना वेंडर मार्केट वीरान भवन बना हुआ है. बिल्डिंग में बिजली भी नहीं दी गयी है. इस वजह से इसकी रखवाली करने वाले गार्ड रात में खुद ही भयभीत रहते हैं.

रास्ता बनाने का काम अभी भी है जारी

कुछ ऐसा ही हाल स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के साथ भी किया जा रहा है. विवेकानंद की प्रतिमा तक जाने का अब तक कोई पक्का रास्ता नहीं बना है. उद्घाटन को देखते हुए रास्ते की किसी तरह, आनन-फानन में सिर्फ ढलाई कर दी गयी है. कुछ स्थानों पर तो यूंही स्लैब रख दिया गया है. कई जगह पर रॉड निकला हुआ है, जिसे बोरा से ढकने का प्रयास किया गया.

17 करोड़ की है पूरी योजना 

रांची के बड़ा तालाब में 33 फिट ऊंची स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा लगायी गयी है. ये पूरी योजना 17 करोड़ की है. इसमें से तीन करोड़ रुपये प्रतिमा निर्माण में खर्च हुए हैं. शेष 14 करोड़ से सौंदर्यीकरण का काम किया जाना है. जो कि अभी जारी ही है. प्रतिमा का काम देश के जाने-माने मुर्तिकार रामवंजी सुतार ने किया है. इन्होंने ही स्टेच्यू ऑफ यूनिटी के  नाम से प्रसिद्ध सरदार बल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा भी बनायी है. सुतार ने तो प्रतिमा का निर्माण समय पर कर दिया लेकिन राज्य सरकार अबतक सौंदर्यीकरण का काम पूरा नहीं कर सकी. 2017 में ही इस योजना को तैयार किया गया था. लेकिन इसकी धीमी रफ्तार ने इसे समय से पूरा नहीं होने दिया.

रेड कारपेट, सफेद चादर, बोरा और हरी प्लास्टिक से गंदगी छिपाने का प्रयास 

गंदगी के बीच अवस्थित रांची के बड़ा तालाब से शायद ही कोई अपरिचित हो. लेकिन इसकी सफाई कराने के बजाय इसे चादरों से ढंकने का हास्यास्पद प्रयास राज्य सरकार ने किया है. रघुवर सरकार ने जल्दीबाजी में प्रतिमा के अनावरण करने की घोषणा कर दी. काम में तेजी लाकर साफ-सफाई का काम और प्रतिमा स्थापित करने का काम समय से हो सकता था. लेकिन सरकारी उदासीनता के कारण ही अनवारण के समय तक काम चलता रहा. इतना ही नही अभी भी काम पूरा सम्प्पन नहीं हुआ है. राज्य की यह शायद पहली ऐसी योजना होगी, जिसका उद्घाटन के बाद भी काम होता रहेगा. जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए इसे पहले चरण और दूसरे चरण का नाम दिया गया है.

भारी रिस्क के बीच किया गया स्वामी जी की प्रतिमा का अनवारण 

प्रतिमा तो स्थापित हो चुकी है, लेकिन वहां तक जाने का रास्ता खतरनाक है. तीन दिन पहले ही ढलाई हुई है. ढलाई के स्थानों में अब भी रॉड निकले हुए हैं. ऐसे में भारी रिस्क के बीच रघुवर सरकार ने प्रतिमा के अनवारण का निर्णय लिया. सिर्फ बांस के सहारे से लोगों को पानी में गिरने से रोकने का उपाय किया गया था. वहीं इसके लिए एनसीसी कैडेट को नियुक्त गया था जो लोगों पर नजर रख रहे थे.

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