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झारखंड में नक्सलवाद को लेकर गृह मंत्री का बयान और गृह मंत्रालय की रिपोर्ट अलग-अलग, आखिर माजरा क्या है?

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Kumar Gaurav

Ranchi: झारखंड में चुनाव की घोषणा के दिन से एक बड़ा सवाल जनता के सामने तैर रहा है. चुनाव आयोग ने चुनाव की घोषणा के साथ ही कहा कि झारखंड के 24 में से 19 जिले नक्सल प्रभावित हैं.

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राज्य सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री राज्य को नक्सलमुक्त बता रहे हैं. वहीं गुरुवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने स्पष्ट तौर पर कहा कि राजनीतिक बयानों से आयोग को कोई मलतब नहीं है.

गृह मंत्रालय से प्राप्त लिखित डॉक्यूमेंट सरकार के पास है. जिसके तहत राज्य के 24 में से 19 जिले नक्सल प्रभावित हैं और जिनमें से 13 जिलों को अतिनक्सल प्रभावित बताया गया है.

गृह मंत्रालय की रिपोर्ट से अलग गृह मंत्री ने चुनावी सभा में यह बयान दिया है कि आज झारखंड नक्सल मुक्त हो चुका है और नक्सल उन्मूलन का श्रेय रघुवर दास को दिया जाना चाहिए.

इसके अलावा भी अमित शाह ने पार्लियामेंट में दिये अपने बयान में कहा था कि झारखंड में उग्रवाद में 45 फीसदी की कमी आयी है. अमित शाह के इन दो स्टेटमेंट में ही काफी अंतर है.

जनता इसी बात में उलझ चुकी है कि आखिर सच क्या है, अमित शाह का सदन में दिया स्टेटमेंट, चुनाव प्रचार के दौरान लोहरदगा में दिया भाषण या फिर गृह मंत्रालय की रिपोर्ट.

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अफसरों ने क्यों नहीं दी नक्सलवाद के खत्म होने की जानकारी

राज्य सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अगर यह कहते हैं कि राज्य उग्रवाद मुक्त हो चुका है या फिर सदन में दिये बयान को ही माना जाये कि 45 फीसदी की कमी आयी है, तो फिर आखिर क्यों सरकार के किसी भी अधिकारी ने नक्सल मुद्दे पर आधिकारिक स्तर पर दिये गये प्रेजेंटेशन में नक्सलवाद के खत्म होने संबंधी जानकारी नहीं दी. मुख्य चुनाव आयुक्त ने भी स्वीकार किया कि अफसरों ने उग्रवाद घटने की कभी जानकारी नहीं दी.

उग्रवाद प्रभावित राज्यों की विशेष आर्थिक सहायता के लिए 775 करोड़ में 340 करोड़ सिर्फ झारखंड को केंद्र सरकार द्वारा दी जाती है.

इस साल इन राज्यों सभी राज्यों के लिए कुल 775 करोड़ रुपये दिये गये. जिसमें से सिर्फ झारखंड को उग्रवाद प्रभावित ईलाकों के विकास और उन्मूलन के लिए 340 करोड़ रुपये दिये गये. जिसे उग्रवाद प्रभावित जिलों में खर्च किया जाना है.

वहीं झारखंड के बाद छत्तीसगढ़ को 200 करोड़ रुपये दिये गये. मतलब साफ है कि देशभर में गृह मंत्रालय के हिसाब से झारखंड सबसे अधिक उग्रवाद प्रभावित राज्य है. पर यह भी सोचने वाली बात है कि क्यों सदन में और अपने भाषणों में देश के गृह मंत्री झारखंड में उग्रवाद के कम होने की बात कर रहे हैं.

कहीं अधिकारी इस विशेष पैकेज की वजह से तो उग्रवाद के कम होने की जानकारी जानबूझ कर गृह विभाग और नक्सल मुद्दे पर आधिकारिक तौर पर देने से बच रहे हैं.

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विशेषज्ञों की मानें तो 2010 के बाद से ही कम होता चला गया उग्रवाद

राज्य में उग्रवाद और क्राइम जैसे विषयों पर काम करनेवाले विशेषज्ञों की मानें तो राज्य में उग्रवाद 2010 के बाद से ही कम होता चला गया. 2010 में चलाये गये ऑपरेशन ग्रीन हंट जो बाद में भी जारी रहा उसकी वजह से ही कम होता चला गया.

उनकी मानें तो राज्य सरकार का उग्रवाद समाप्त होने की बात में बहुत हद तक सच्चाई भी है. उग्रवाद प्रभावित राज्यों और जिलों के लिए सेक्यूरिटी रिलेटेड एक्पेंडिचर और सेकरेट सर्विस फंड दिया जाता है जो करोड़ों में होता है. यह भी अधिकारियों के नक्सलवाद मुक्त या कम होने की जानकारी केंद्रीय गृह विभाग को नहीं देने की वजह भी हो सकती है.

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