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कोर्ट फीस पर कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर अति शीघ्र निर्णय लेगी राज्य सरकार, HC में सरकार ने कहा

Ranchi: झारखंड स्टेट बार काउंसिल द्वारा राज्य सरकार की कोर्ट फीस अमेंडमेंट एक्ट को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में सुनवाई गुरुवार को हुई. इस दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि कोर्ट फी को लेकर बनाई गई 3 सदस्य वाली कमेटी की रिपोर्ट  के आधार पर राज्य सरकार अति शीघ्र निर्णय लेगी. 7 दिसंबर तक इस पर निर्णय लेने का आश्वासन दिया गया. साथ ही कोर्ट से  7 दिसंबर तक का समय मांगा गया. जिस पर कोर्ट ने मामले की सुनवाई 8 दिसंबर निर्धारित की. कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि कमेटी  की रिपोर्ट के आलोक में जो भी निर्णय  राज्य सरकार की ओर से लिया जाएगा उसकी जानकारी सभी पक्ष के अधिवक्ताओं को दिया जाए. सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी वरीय अधिवक्ता वीपी सिंह और  अधिवक्ता रश्मि कुमार उपस्थित थे. पूर्व की सुनवाई में कोर्ट को बताया गया था कि नए कोर्ट फीस कानून में 2 अनुसूची है. जिसमें समिति ने केवल अनुसूचित एक (निचली अदालतों में दिए जाने वाले कोर्ट फीस) के बारे में ही अनुशंसा की है. मगर अनुसूचित दो, जो हाईकोर्ट की कोर्ट फीस से संबंधित है उसके बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहा है. पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने यह भी कहा था कि नए कानून के हिसाब से अगर कोर्ट फीस वसूल किया जाता है तो वह केस के अंतिम निर्णय से प्रभावित होगा. प्रार्थी की ओर से कहा गया था कि कोर्ट फीस में बेतहाशा वृद्धि सरकार द्वारा इस कानून के माध्यम से की गई है. कोर्ट फीस वृद्धि से पहले आवश्यक पहलू की जांच पड़ताल नहीं की गई.

क्यों हो रहा है विरोध

पूर्व की सुनवाई में राजेंद्र कृष्ण ने मामले में पैरवी करते हुए कोर्ट से कहा था कि कोर्ट फीस में बेतहाशा वृद्धि से समाज के गरीब तबके के लोग कोर्ट नहीं आ पायेंगे और वकीलों को भी अतिरिक्त वित्तीय भार का वहन करना पड़ेगा. काउंसिल ने यह भी कहा है कि कोर्ट फीस की वृद्धि से लोगों को सहज व सुलभ न्याय दिलाना संभव नहीं है.राज्य सरकार का कोर्ट फीस एक्ट गलत है. यह संविधान के खिलाफ है. साथ ही यह सेंट्रल कोर्ट फीस एक्ट के भी विरुद्ध है.

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