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चाई जाति सहित निषाद वंशीय समाज को SC का दर्जा देने के लिए केंद्र के पास प्रस्ताव भेजेगी राज्य सरकार

Ranchi. चाई जाति सहित निषाद वंशीय समाज को अनुसूचित जाति का दर्जा देने की गति तेज होने को है. जल्दी ही राज्य सरकार केंद्र के पास इसका प्रस्ताव भेजेगी. झारखंड विधानसभा में विधायक अनंत ओझा द्वारा उठाये गये ध्यानाकर्षण के दौरान मंत्री आलमगीर आलम ने इसकी घोषणा मंगलवार को की.

पिछले कार्यकाल के दौरान भी विधानसभा के माध्यम से अनंत ओझा ने चाई जाति सहित निषादवंशीय समाज की उपजाति केवट, मल्लाह, विन्द, नमोशूद्र, गोढी को अनुसूचित जाति-जनजाति का दर्जा देने की मांग की थी.

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टीआरआइ ने भी दी है सहमति

रघुवर दास सरकार के समय चाई समेत अन्य जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा दिये जाने का मसला रामदयाल मुंडा जनजातीय शोध संस्थान, रांची को भेज दिया गया था.

संस्थान ने इसके बाद इन जातियों से संबंधित सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण कराया.
रघुवर सरकार के कार्यकाल के अंतिम वर्ष में जनजातीय शोध संस्थान ने उपरोक्त जातियों को उनके उन्नयन के लिए अनुसूचित जाति में शामिल करने की सिफारिश कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी.

अनंत ओझा ने इसी रिपोर्ट के आधार पर केंद्र के पास प्रस्ताव भेजने को कहा. इस पर राज्य सरकार ने सहमति जतायी है. सरकार के अनुसार इस विषय पर फैसला लेने का अधिकार केंद्र सरकार का ही है.

राजमहल मानिकचक गंगा पुल की डिमांड

राजमहल से मानिकचक के बीच गंगा नदी के उपर पुल बनाये जाने की भी मांग सदन में की गयी है. अनंत ओझा के मुताबिक पुल निर्माण होने से साहेबगंज सहित पूरे संथालपरगना प्रक्षेत्र में विकास का मार्ग प्रशस्त होगा. देश के अंदर बिहार, उत्तर प्रदेश व विभिन्न राज्यों में गंगा पर दर्जनों पुल का निर्माण कराया जा रहा है.

केंद्र सरकार के सहयोग से साहेबगंज से मनिहारी गंगा पुल का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है. नये पुल के निर्माण से झारखंड का बिहार और नेपाल से भी दूरी कम हो जाएगी. राजमहल से मानिकचक के बीच गंगा पुल के निर्माण की डिमांड जनता अरसे से कर रही है.

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