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एसपी ने दी जिसे क्लीन चिट उस पर ACB जांच और जिसकी गिरफ्तारी का था आदेश उसे मिला प्रमोशन

Akshay Kumar Jha

Ranchi : 25 नवंबर को सीएम हेमंत सोरेन ने हेमा प्रसाद तत्कालीन सीओ जामताड़ा के विरुद्ध एसीबी जांच का आदेश दिया है. उन पर आरोप है कि सीओ रहते हुए जामताड़ा जिला के मिहिजाम थाना अन्तर्गत बुटकेरिया मौजा में अवैध रूप से जमीन की खरीद बिक्री की है. इस मामले को लेकर मिहिजाम थाने में 17 जून 2016 को मामला दर्ज हुआ था. दर्ज एफआइआर में नौ लोगों को आरोपी बनाया गया था. मामले की जांच के लिए तत्कालीन डीसी ने डीडीसी की अध्यक्षता में एक जांच समिति बनायी थी. जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन एसपी ने तत्कालीन सीओ हेमा प्रसाद को क्लीन चिट दे दी थी. साथ ही बाकी सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार करने का आदेश दिया था. लेकिन हुआ ऐसा कि जिसे गिरफ्तार करने का आदेश दिया गया, उसे सरकार प्रमोशन दे रही है और जिसे क्लीन चिट मिली उस पर एसीबी जांच के लिए सीएम हेमंत सोरेन ने अनुशंसा की है. ऐसा होने पर झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के बीच यह चर्चा आम है कि आरोपी को बरी किया जा रहा है और क्लीन चिट मिलने वाले को आरोपी बनाया जा रहा है.

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सरिता दास की गिरफ्तारी का था आदेश, मिला प्रमोशन

25 नवंबर को कार्मिक विभाग की तरफ से जारी अधिसूचना में पहला नाम सरिता दास का है. सरिता दास फिलहाल गृह विभाग में गृह कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग में पदस्थापित हैं. उन्हें उप सचवि से संयुक्त सचिव के पद पर प्रमोशन दिया गया है. जबकि 27 अप्रैल 2021 को तत्कालीन एसपी जामताड़ा ने सरिता दास को गिरफ्तार करने का आदेश दिया था. उनके आदेश में साफ कहा गया था कि फरारी की सूरत में सरिता दास समेत तमाम आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जाये. उसी आदेश में आरोपी हेमा प्रसाद को ठोस साक्ष्य के आधार पर एसपी ने क्लीन चिट दी थी. फिर भी अब हेमा प्रसाद पर सीएम हेमंत सोरेन की तरफ से एसीबी जांच की अनुशंसा की गयी है. वहीं सरिता दास को प्रमोशन दिया गया है.

क्या था पूरा मामला  

जामताड़ा के मिहिजाम में 38.12 एकड़ मुकर्ररीर रैयती जमीन को 310 लोगों को बीच अवैध रूप से बेचा गया था. जबकि इस नेचर की जमीन की खरीद बिक्री नहीं की जा सकती. लेकिन निबंधक रहते हुए सरिता दास ने जमीन के नेचर में छेड़छाड़ की और जमीन का नेचर बसौढी कर दिया. नेचर बदलने के बाद जमीन का निबंधन कर दिया. जिससे जमीन की खरीद बिक्री संभव हो पायी. ऐसे गंभीर आरोप के बावजूद सरिता दास को एसीबी की जांच से बाहर रखा गया है. वहीं आरोपी साबित होने के बाद भी, गिरफ्तारी का आदेश जारी होने के बाद भी सरिता दास को प्रमोशन दे दिया गया. जब यह कांड हुआ था तो उस वक्त हेमा प्रसाद वहां की सीओ थीं.

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