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महागठबंधन के सात विधायक चल रहे नाराज, जानिये वो कौन हैं…

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Pravin Kumar

Ranchi: जितने उत्साह से महागठबंधन की नींव रखी गई थी. वह कहीं न कहीं कमजोर पड़ती दिख रही है. या फिर यूं कहे कि महागठबंधन की गांठ दिन-ब-दिन ढीली होती नजर आ रही है. वजह है दलों के बीच तालमेल की कमी.

सार्वजनिक मंच पर झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक की गैरमौजूदगी भी कई तरह के कयासों को जन्म दे रही है. दबी जुबां से पार्टी कार्यकर्ता और विधायक कह रहे हैं कि कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा को निगल जायेगा.

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कांग्रेस के साथ-साथ और दूसरी राट्रीय पार्टियों का यह चरित्र भी रहा है. झारखंड मुक्ति मोर्चा विधायक जयप्रकाश भाई पटेल पार्टी लाइन के खिलाफ हो गये हैं.

उनकी बगावत से झामुमो के अंदर भूचाल आ गया है. कांग्रेस से दावेदारी ठोंकने वाले मीनाक्षी मुंडा और प्रदीप प्रसाद अलग राह पर निकल पड़े हैं.

झाविमो के साथ काम करने वाली नीलम देवी और प्रभात भुइंया बाबूलाल का साथ छोड़ चुके हैं. राजद नेत्री अन्नपूर्णा देवी और हेवीवेट गिरिनाथ सिंह अब कमल के बैनर तले आ गये हैं. यह हालात महागठबंधन में ब्लैकहोल की स्थिति दर्शा रहा है.

कहां दिख रहा महागठबंधन में ब्लैक होल

सिंहभूम, खूंटी और हजारीबाग लोकसभा सीट कांग्रेस के लिए परेशानी का सबब बन रही है. इन सीटों पर नामांकन के बाद की गई सभा में महागठबंधन दल के विधायक की गैरमौजूदगी उनके गुस्से और नाराजगी को सामने ला रही है.

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क्या कहते हैं झामुमो विधायक

पौलूस सुरीन: महागठबंधन के साथ पार्टी के सभी नेता और कार्यकता हैं. साथ ही कहा कि, जहां तक खूंटी सीट की बात है. उस पर मैंने खुद चुनाव लड़ने की इच्छा से अपने शीर्ष नेतृत्व को अवगत करा दिया था.

साथ ही मैं पहले ही कह चुका था कि गठबंधन का उम्मीदवार जन भावनाओं के अनुरूप होगा तो चुनाव में उस्ताह दिखेगा. जिसकी आज इलाके में कमी दिख रही है.

हमें यह उत्साह फिर से बनाना है. पार्टी के निर्णय के साथ हम लोग खड़े हैं. हम प्रयास करेंगे यूपीए प्रत्याशी को हमारे विधानसभा से लीड मिले.

लेकिन गठबंधन दलों को भी यह सोचना होगा कि वो सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं के मान-सम्मान को बनाये रखें. जिस पार्टी के उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं ये उनका दायित्व है कि गठबंधन दलों के नेता को भी साथ लेकर चले. ऐसा नहीं होता तो जीत हार में बदल जायेगी. जबकि राज्य को सबसे बड़ा खतरा भाजपा और उसके नेताओं से है.

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दशरथ गगरई: खरसावां विधायक दशरथ गगराई कहते हैं, यूपीए प्रत्याशी की जीत हो यह हमारा प्रयास है. घर-परिवार में किसी मुद्दे को लेकर मतभेद जरूर होता है. लेकिन उसका अर्थ यह नहीं कि घर के मुखिया की बात हम न मानें.

खूंटी लोकसभा से कांग्रेस उम्मीदवार चुनाव पूर्व भी हमारे क्षेत्र में सक्रियता नहीं थे. ऐसे में यूपीए प्रत्याशी को जिताने के दायित्व गठबंधन के विधायकों पर है.

ऐसी स्थिति में महागठबंधन का उम्मीदवार कौन है, कैसा है यह भी अब विषय नहीं रह गया है. लेकिन यूपीए को जिताने के सकल्ंप के साथ पार्टी के सभी कार्यकर्ता और नेता खड़े हैं.

शशिभूषण सामड: सिंहभूम लोकसभा क्षेत्र के चक्रधरपुर विधायक शशि भूषण सामड कहते हैं कि महागठबंधन उम्मीदवार गीता कोड़ा के नामांकन में झामुमो के विधायक मौजूद नहीं रहे यह सच है. दरअसल हमारे क्षेत्र में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम तय था.

चुनाव के समय में कार्यकर्ताओं के बैठक में शामिल होना जरूरी था. क्योकि चुनाव तो कार्यकर्ता लड़ते हैं नेता तो सिर्फ नेतृत्व करते हैं. इसलिए नामांकन में शामिल नहीं हुआ. वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा के हिस्से में टिकट नहीं आने से पार्टी कार्यकर्ताओं को थोड़ी नाराजगी जरूर हुई है.

पार्टी विधायक चाहते थे कि सिंहभूम सीट पर झामुमो उम्मीदवार चुनाव लड़ें. इसे लेकर कार्यकर्ता निराश जरूर हैं, लेकिन सभी कार्यकर्ता भाजपा को हराने में काम करेंगे.

गठबंधन की रणनीति को लेकर चाईबासा विधायक दीपक बिरूआ और जोबा मांझी से भी बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन बंद आया. जबकि निरल पूर्ति और चमरा लिड़ा कॉल रिसीव नहीं कर रहे हैं.

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