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पेयजल और स्वच्छता विभाग के अभियंता प्रमुख की पोस्टिंग में आया पेंच

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  • वर्तमान अभियंता प्रमुख 31 जनवरी को होंगे सेवानिवृत्त
  • दावेदारी में सामान्य कोटे से श्वेताभ कुमार और अनुसूचित जनजाति संवर्ग से हीरा लाल प्रसाद की दावेदारी मजबूत
  • हाईकोर्ट ने पूर्व अभियंता प्रमुख हीरा लाल प्रसाद के नाम पर भी विचार करने का दिया आदेश

Ranchi: पेयजल और स्वच्छता विभाग में अभियंता प्रमुख की पोस्टिंग में एक बार फिर पेंच फंस गया है. 29 अक्तूबर को नियमित मुख्य अभियंता बने श्वेताभ कुमार इस पद के लिए मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं. पर पूर्व अभियंता प्रमुख हीरा लाल प्रसाद के मामले पर हाईकोर्ट ने इनके नाम पर भी विचार करने का आदेश दिया है. अनुसूचित जनजाति संवर्ग से आनेवाले श्री प्रसाद के अलावा एक अन्य मुख्य अभियंता सृष्टिधर मोदी भी अभियंता प्रमुख बनने की दौड़ में चल रहे हैं. झारखंड हाईकोर्ट के फैसले के बाद से इस पद पर पदस्थापन को लेकर विभागीय प्रोन्नति समिति भी फंसती जा रही है. श्री प्रसाद क्षेत्रीय मुख्य अभियंता रांची और श्री मोदी क्षेत्रीय मुख्य अभियंता दुमका के पद पर हैं. विभागीय नियमों के अनुसार तीन वर्ष तक मुख्य अभियंता का नियमित कार्यभार देखनेवाले को ही अभियंता प्रमुख बनाने का हवाला दिया गया है. 2010 के बाद से इस पद को लेकर वरीयता को तरजीह नहीं मिली है. तत्कालीन अभियंता प्रमुख शारदेंदू नारायण के बाद से इस पद पर जिस तरह रमेश कुमार और तनवीर अख्तर की पोस्टिंग की गयी, वह संदेह के घेरे में है.

1987 बैच के अधिकारियों में है लड़ाई

अभियंता प्रमुख के पद को लेकर 1987 बैच के सीधी नियुक्तिवाले अभियंताओं में ही अधिक टक्कर है. श्वेताभ कुमार, उमेश गुप्ता, नवरंग सिंह, हीरा लाल प्रसाद सभी 1987 बैच के अधिकारी हैं. वहीं सृष्टिधर मोदी 1989 बैच के अधिकारी हैं. श्री प्रसाद और श्री मोदी को 2015 में ही मुख्य अभियंता पद पर प्रोन्नति मिली थी. वहीं उमेश गुप्ता ने मुख्य अभियंता के पद पर प्रोन्नति नहीं दिये जाने को लेकर हाईकोर्ट की शरण ली है. नवरंग सिंह को भी मुख्य अभियंता नहीं बनाया गया है.

मुख्य अभियंता स्तर के पांच पद हैं विभाग में

मुख्य अभियंता स्तर के पांच पद पेयजल और स्वच्छता विभाग में हैं. इनमें मुख्य अभियंता मुख्यालय, मुख्य अभियंता (सीडीओ), मुख्य अभियंता (पीएमयू) और दो क्षेत्रीय मुख्य अभियंता का पद है.

क्या कहते हैं संयुक्त सचिव

विभाग के संयुक्त सचिव एके अंबष्ट का कहना है कि झारखंड हाईकोर्ट के फैसले के बाद उपरोक्त सभी नामों पर चर्चा की जायेगी. उन्होंने कहा कि फिलहाल मुख्य अभियंता का एक पद खाली है. 31 जनवरी 2019 के बाद दो मुख्य अभियंता का पद खाली हो जायेगा. विभागीय प्रोन्नति समिति की बैठक में सभी पांच पद पर नियमित मुख्य अभियंता की पोस्टिंग कर दी जायेगी. इनमें से विभागीय वरीयता सूची और बेदाग नाम वाले अधिकारी को अभियंता प्रमुख बनाया जायेगा.

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