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6 बार की नियुक्ति में 8 बार बदली नियमावली, फिर भी 39408 शिक्षकों के पद हैं खाली

एक बार फिर से 9वीं बार नियमावली बदलने की प्रक्रिया शुरू

Rahul Guru 

Ranchi : झारखंड में स्कूली शिक्षा पर 530 करोड़ रुपये से अधिक राशि खर्च होते हैं. ऐसे में शिक्षकों की संख्या के साथ ही उनकी नियुक्ति नियमावली भी महत्वपूर्ण हो जाती है. यही कारण है कि राज्य में जितनी विभिन्न श्रेणी के स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई है, उससे अधिक बार शिक्षकों की नियुक्ति नियमावली को ही बदल दिया गया. बता दें कि अब तक राज्य में आठ बार नियुक्ति नियमावली बदल चुकी है. एक बार फिर से अब 2020 में 9वीं बार नियमावली बदलने की प्रक्रिया चल रही है. वहीं नियुक्तियों की बात करें तो अब तक केवल छह बार ही शिक्षकों की नियुक्ति हुई है. छह बार नियुक्ति और आठ बार नियुक्ति नियमावली में बदलाव के बाद भी राज्य के स्कूल 39 हजार शिक्षकों की राह ताक रहे हैं.

2002 में पहली बार बनी नियुक्ति नियमावली

राज्य गठन के बाद पहली बार वर्ष 2002 में झारखंड में शिक्षक नियुक्ति नियमावली बनी थी. इसके बाद प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में नियुक्ति के लिए साल 2012 में अलग नियमावली बनायी गयी. इस नियमावली में साल 2015 में संशोधन किया गया. इसके बाद एक-एक कर पांच बार संशोधन किया जा चुका है. जानकारी के अनुसार अब फिर से एक बार नियमावली को बदलने की कवायद चल रही है.

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जानें कब-कब हुई राज्य में शिक्षकों की नियुक्ति

राज्य के स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में नियुक्ति से शुरू हुई थी. साल 2008 में प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में 4500 शिक्षकों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला गया. इसके बाद साल 2010 में राजकीय कृत उच्च विद्यालय में 2300 शिक्षकों की नियुक्ति का विज्ञापन निकला. साल 2012 में प्लस टू उच्च विद्यालय में शिक्षकों के 1840 पदों में नियुक्ति का विज्ञापन जारी किया गया. फिर साल 2015 में अपग्रेड हाईस्कूल में शिक्षकों के लगभग 1200 पदों में नियुक्ति का विज्ञापन निकला. पुन: साल 2017 में प्लस टू स्कूलों में 513 शिक्षकों की नियुक्ति का विज्ञापन आया. शिक्षकों की नियुक्ति का अद्यतन विज्ञापन साल 2018 में लगभग तीन हजार पद के लिए आया.

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एक शिक्षक पर 76 बच्चों को पढ़ाने का दबाव

राज्य में प्राइमरी से लेकर प्लस टू तक के कुल 35,477 स्कूल हैं. जहां 42 लाख बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं. इन बच्चों को पढ़ाने के लिए लगभग 55000 शिक्षक ही हैं. राज्य में एक शिक्षक पर 76 बच्चों को पढ़ाने का दबाव है. अब राज्य के स्कूल 40 हजार शिक्षकों के आने की राह ताक रहे हैं.

शिक्षकों के 94 हजार पदों में से 40 हजार पद खाली

रिक्त पदों की बात करें तो प्राथमिक स्कूलों में 17835, मध्य विद्यालयों में 4893,उच्च विद्यालय में 13616 और प्लस टू स्कूल में 3064 पद रिक्त हैं. वहीं राज्य में जितनी बार भी शिक्षकों की नियुक्ति हुई है, सीटें रिक्त ही रह गयी हैं. साल 2008 में हुई 4500 पदों की नियुक्ति में 491 पद ही भरे. इसी तरह साल 2010 में 2300 पद में 700 पद रिक्त रहे. साल 2012 में 562 पद रिक्त रह गये. साल 2015 में 250 पद में 168 शिक्षक ही नियुक्त हुए. साल 2017 की नियुक्ति में 513 में 200 और साल 2018 की 3080 पद के मुकाबले 1500 शिक्षकों की ही नियुक्ति हो सकी.

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