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भूमंडलीकरण के दौर में समाजशास्त्रियों की अहम भूमिका : सीपी सिंह

आरयू में तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन, जुटे पूरे देशभर के समाजशास्त्री

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Ranchi : समाजशास्त्री समाज में विचार एवं शोध को प्रयोग के स्तर पर उतारने का प्रयास करें. भूमंडलीकरण के दौर में समाजशास्त्रियों की अहम भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता है. आधुनिकतावाद के दौर में समाज किस दौर से गुजर रहा है, इस पर मंथन और चिंतन करने की जरूरत है. उक्त बातें मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड के नगर विकास मंत्री सीपी सिंह ने गुरुवार को रांची विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में कहीं. रांची विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग की ओर से आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया जा रहा है. इसमें देश-विदेश के समाजशास्त्री शिरकत कर रहे हैं. इसका विषय भूमंडलीकरण के दौर में सामाजिक परिवर्तन एवं उनकी चुनौतियां रखा गया है.

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गुरुवार से शुरू हुए इस सेमिनार में विशिष्ट अतिथि के रूप में आरयू के कुलपति प्रो रमेश कुमार पांडेय ने कहा कि बिहार एवं झारखंड में पहली बार इस तरह का सेमिनार आरयू की ओर से आयोजित किया जा रहा है. इसके माध्यम से समाजशास्त्री समाज के प्रति सचेष्ट होकर मंथन एवं चिंतन करेंगे, ताकि इसका लाभ पूरे देश के सामाजिक जीवन को मिले. भारतीय सोशियोलॉजिकल सोसाइटी (आईएसएस) के अध्यक्ष डॉ आर इंदिरा ने भूमंडलीकरण से उत्पन्न चुनौतियों को सात भागों में बांटते हुए कहा कि वर्तमान में पूरी दुनिया इसके सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभाव से ग्रसित है. हमें सोचना है कि परिवर्तन कैसे और क्यों हो रहे हैं और उसका निदान कैसे संभव हो सकता है. मानव जीवन के हर स्तर पर पड़नेवाले परिवर्तन और उसके प्रभाव पर गंभीर रूप से चिंतन एवं मंथन करने की जरूरत है. वही, डॉ केदार प्रसाद आचार्य ने कहा कि सत्य है कि परिवर्तन और प्रेरक भूमंडलीकरण ही है, लेकिन मानव को इन परिवर्तनों और प्रभावों के संदर्भ में भविष्य के लिए चिंतन करना चाहिए.

लोकतंत्र को पहले जनता नियंत्रित करती थी, अब धनतंत्र नियंत्रित कर रहा है

इस अवसर पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के अवकाशप्राप्त प्रोफेसर डॉ आनंद कुमार ने कहा कि इस भूमंडलीकरण में उससे जनित समस्याओं की चुनौतियों का जवाब नहीं मिल पा रहा है और न समाधान ही. पहले लोकतंत्र को जनता नियंत्रित करती थी, आज धनतंत्र नियंत्रित कर रहा है. ऐसे में यह लोकतंत्र धनतंत्र में परिणत हो गया है. सरकार की बहुप्रचारित योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम आदमी को नहीं मिल पा रहा है. बाजार द्वारा नियंत्रित जीवनशैली में भारत की अधिकांश आबादी अनिश्चय और गरीबी में जी रही है. पानी अमीर की अट्टालिकाओं और झुग्गियों कहीं भी बरस सकता है, लेकिन सूरज की किरणें हर घर तक जायें, यह युग की मांग है. आज यह आबादी पूंजी के लिए खाद बन गयी है.

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सेमिनार में धन्यवाद ज्ञापन रांची विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ अमर कुमार चौधरी ने किया और आशा व्यक्त की कि यह सम्मेलन सार्थक और सफल होगा. सम्मेलन में आये अतिथियों का स्वागत करते हुए रांची विवि के समाजशास्त्र के अध्यक्ष एवं सम्मेलन के संयोजक ने कहा कि यह सम्मेलन इस प्रासंगिक विषय पर ठोस विचार रखेगा, जिसे पुस्तक के रूप मे लोकार्पित किया जायेगा. मंच संचालन संत जेवियर्स कॉलेज के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष डॉ कमल बोस ने किया.

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