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केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा ने जिस जरबा गांव को गोद लिया, वहां की सड़कें बदहाल

प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत केंद्रीय राज्‍य मंत्री जयंत सिन्‍हा ने जिस गांव को गोद लिया था, वहां तक इस बारिश में पहुंचना खतरे से खाली नहीं है.

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Ranchi/Hazaribagh : प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत केंद्रीय राज्‍य मंत्री जयंत सिन्‍हा ने जिस गांव को गोद लिया था, वहां तक इस बारिश में पहुंचना खतरे से खाली नहीं है. जयंत सिन्‍हा ने सांसद बनने के बाद हजारीबाग के चुरचू प्रखंड के जरबा गांव को गोद लिया था. यहां तक पहुंचने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना के तहत पक्‍की सडक बनी थी. जरबा गांव को जोडने वाली इस मुख्‍य सडक की हालत बारिश में नारकीय हो गयी है.

हजारीबाग के सांसद जयंत सिन्‍हा के गोद लिये गांव तक पहुंचने के लिए 14 माइल स्‍थान से गांव तक 7 किलोमीटर सडक बनी हुई है. यह सडक प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना के तहत बनाई गयी है. कायदे से सड़क के आरंभिक स्‍थान और आखिरी छोर में सडक की निर्माण की योजना, प्राक्‍कलित राशि, सड़क निर्माण की तारीख, सड़क बनाने वाली एजेंसी या ठेकेदार का नाम वाला बोर्ड होना चाहिए. लेकिन इस सड़क के लिए ऐसा नहीं है.

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सड़क निर्माण कार्य में बहुत लापरवाही बरती गयी

यहां के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया कि यह सडक 5 साल पहले बनी थी. यह जरबा सहित कई पंचायतों को जोडने वाली मुख्‍य सड़क है. आरोप है कि सड़क का निर्माण कार्य तत्‍कालीन विधायक जयप्रकाश भाई पटेल ने अपने करीबी रिश्‍तेदार की कंपनी को दिलाया था. सड़क निर्माण में बहुत लापरवाही बरती गयी. इसकी गुणवत्‍ता के साथ समझौता किया गया और सड़क कुछ ही समय बाद टूटने लगी. कंपनी के जिम्‍मे 5 साल तक सड़क का रखरखाव भी होता है, जो कभी नहीं किया गया. आज यह सड़क गांव वालों को हादसे का न्‍योता दे रही है.

जरबा गांव की सडकों की बदहाल हालत की तरह ही चुरचु प्रखंड के इंदिरा और हैनदेगडा पंचायतों में बनी आधे दर्जन सड़कों की है. यहां भी प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना के तहत ही सड़कें बनी हैं. इन सडकों की जर्जर अवस्‍था से तीनों पंचायतों की  करीब 15 हजार की आबादी प्रभावित है. सडकों की दुर्दशा देखकर लगता है कि मानो यह नरक का रास्‍ता है. कई बार स्‍कूल जाते बच्‍चे गंदी सडकों पर गिर जाते हैं.

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सड़क बनाने वाली कंपनी सड़क बनाकर अपनी जिम्‍मेदारी और जवाबदेही से दूर हो गयी है

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत यहां जिन सड़कों का निर्माण किया गया है. उसके निर्माण कार्य में घोर लापरवाही बरती गयी है. किसी भी सड़क के बोर्ड पर कार्य प्रारंभ की तिथि, कार्य समाप्ति की तिथि, प्राक्कलित राशि का कोई उल्लेख नहीं है. सड़क बनाने वाली कंपनी सिर्फ सड़क बनाकर अपनी जिम्‍मेदारी और जवाबदेही से दूर हो गयी है. यहां किसी भी कंपनी ने अपने द्वारा बनायी गयी सड़कों की मरम्मत का कार्य नहीं किया. जबकि हर एक सड़क बनाने के साथ-साथ 5 साल तक उसके मेंटेनेंस का भी इकरानामा में जिक्र रहता है और उसके लिए अलग से फंड भी दिया जाता है.

आरटीआई कार्यकर्ता शमशेर आलम ने इस पर सवालिया निशान लगाया है.  उन्होंने कहा कि बडा सवाल यह है कि   जूनियर इंजीनियर/ कार्यपालक अभियंता द्वारा सडक निर्माण कार्य के आधी अधूरी जानकारी देने वाले बोर्ड  की अनदेखी की गयी. उन्‍होंने निर्माणकार्य की गुणवत्ता की जांच कैसे की. इससे तय है कि डिपार्टमेंट की मिलीभगत से सड़क निर्माण कंपनी मेंटेनेंस का पैसा गबन कर रही है.

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