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झारखंड में टेक्निकल पढ़ाई की राह आसान नहीं, स्टूडेंटस लगातार बढ़ते जा रहे, शिक्षक घट रहे

आईटीआई-पॉलिटेक्निक के 100 संस्थान, हर साल औसतन 15 हजार स्टूडेंट्स लेते हैं एडमिशन

Ranchi : चार हजार से अधिक छोटे-बड़े उद्योगों वाले झारखंड राज्य में तकनीकी शिक्षा की स्थिति बेहद ही नाजुक है. यहां संस्थान तो चल रहे हैं. हर साल स्टूडेंट्स एडमिशन भी लेते हैं और बिना शिक्षक के कोर्स पूरा कर निकलते भी हैं. पर जब तकनीकी हुनर के आधार पर नौकरी पाने की बात आती है तो यहीं ढंग से पढ़ाई नहीं कर पाने की वजह से यहां के स्टूडेंट्स पिछड़ जाते हैं.

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शिक्षकों के सृजित पदों में आधे से अधिक हैं खाली

10वीं के बाद आईटीआई और पॉलिटेक्निक(जूनियर इंजीनियर) की पढ़ाई होती है. राज्य में इन दोनों तरह संस्थान की संख्या 100 है. इन संस्थानों में शिक्षकों के सृजित पद 1427 हैं. वहीं कार्यरत शिक्षकों की संख्या केवल 377 है. यानी शिक्षकों के आधे से अधिक पद खाली हैं. जबकि राज्य के पॉलिटेक्निक संस्थाओं में हर साल लगभग पांच हजार और आईटीआई में लगभग 10 हजार स्टूडेंट्स एडमिशन लेते हैं. ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन संस्थानों से पढ़ कर निकलने वाले छात्रों का भविष्य क्या होता होगा.

–              42 पॉलिटेक्निक संस्थान राज्य में हैं

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–              17 राज्य सरकार की ओर से चलाये जाते हैं

–              पांच हजार बच्चे औसतन हर साल पॉलिटेक्निक में लेते हैं एडमिशन

–              376 शिक्षकों के सृजित पद में कार्यरत केवल 77

–              58 सरकारी आईटीआई हैं झारखंड में

–              1051 ट्यूटर के सृजित पद में कार्यरत केवल 300

पॉलिटेक्निक कॉलेजों में न शिक्षक और न प्रिंसिपल

राज्य में कुल 42 जूनियर इंजीनियरिंग कराने वाले संस्थान हैं. इसमें 17 राज्य सरकार खुद संचालित करती है. 08 पॉलिटेक्निक टेक्नो इंडिया के भरोसे चलाती है. वहीं 17 निजी पॉलिटेक्निक संस्थान भी हैं. राज्य सरकार के अपने 17 राजकीय पॉलिटेक्निक में शिक्षकों की संख्या केवल 77 है. इन कॉलेजों में शिक्षकों के स्वीकृत पद 376 हैं.

अन्य प्रमुख पदों की बात करें तो राजकीय पोलिटेक्निक संस्थानों में प्रिंसिपल के 17 पद हैं, जिसमें 10 खाली हैं. इसी तरह विभागाध्यक्ष के 39 स्वीकृत पद में से 38 खाली हैं. राज्य गठन के 20 साल बाद सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेजों को केवल 07 प्राचार्य मिले हैं, जबकि अब भी 10 पॉलिटेक्निक बिना प्राचार्य या प्रभारी प्राचार्य के भरोसे चल रहा है.

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58 आईटीआई में केवल 300 इंस्ट्रक्टर

वहीं राज्य के आईटीआई संस्थानों की बात करें तो राज्य में 58 सरकारी आईटीआई हैं. ये संस्थान श्रम और कौशल विकास विभाग की ओर से संचालित किये जा रहे हैं. इन संस्थानों के भवन तो नये और दुरूस्त हैं. लेकिन सबसे अहम बिंदु यानी पढ़ाने वाले शिक्षक की बात आती है जो काफी खराब है. राज्य के 58 आईटीआई में केवल 300 इंस्ट्रक्टर हैं, जबकि पद 1051 है. एक तिहाई इंस्ट्रक्टर के भरोसे हजारों छात्र तकनीकी ज्ञान की जगह केवल डिग्री ले रहे हैं. प्रैक्टिकल नॉलेज नहीं होने से छात्रों का स्किल डेवलपमेंट नहीं होता है. राज्य के 58 आइटीआइ को केवल सात प्राचार्य संभाल रहे हैं. असल में राज्य गठन के बाद प्रिंसिपल की भी नियुक्ति हुई ही नहीं. वर्तमान में जो प्रिंसिपल हैं, वे वर्ष 2021 से सेवानिवृत्त होने लगेंगे और वर्ष 2026 तक सभी रिटायर हो जायेंगे.

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