न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

बुद्धा शैक्षणिक विकास परिषद को तीन एकलव्य आवासीय मॉडल विद्यालय का संचालन का जिम्मा

संस्थान में निदेशक हैं राज्य नि:शक्तता आयुक्त की पत्नीतीन और संगठनों में भी निदेशक का काम देख रही हैं राधिका चंद्रा

175

Ranchi: झारखंड के नि:शक्तता आयुक्त सतीश चंद्रा की पत्नी द्वारा संचालित कई स्वंयसेवी संस्थानों में से एक संस्था बुद्धा शैक्षणिक विकास परिषद को कल्याण विभाग  ने तीन से अधिक एकलव्य आवासीय मॉडल स्कूल चलाने का जिम्मा दे रखा है. सरकार की तरफ से सभी संस्थानों के साथ फिर से द्विपक्षीय समझौता किया जा रहा है. इस संस्थान को जामताड़ा, किस्को, लोहरदगा में एकलव्य विद्यालय के संचालन का जिम्मा मिला है. इतना ही नहीं कल्याण विभाग की तरफ से संचालित अनुसूचित जनजाति बालिका आवासीय विद्यालय के दो स्कूलों के प्रबंधन का जिम्मा भी सरकार की तरफ से दिया गया है. श्री चंद्रा की पत्नी राधिका चंद्रा राधिका इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेशल एजुकेशन (राइज), इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेशल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग, धनबाद, ग्रीन वैली ट्रेनिंग कॉलेज धनबाद और बुद्धा शैक्षणिक विकास परिषद और अंबेदकर शिक्षण संस्थान से भी जुड़ी हैं. श्री चंद्रा के अनुसार उनकी पत्नी मानक निदेशक हैं. उन्होंने कहा कि कल्याण विभाग की तरफ से उपरोक्त संस्थान का चयन किया गया है. कल्याण विभाग की तरफ से एकलव्य विद्यालय के संचालन के लिए स्वंयसेवी संस्थानों को पांच करोड़ रुपये सलाना मुहैया करायी जाती है. इन संस्थानों को पहले दो साल तक विद्यालय चलाने की अनुमति दी गयी थी. इसके बाद सेवा विस्तार देने की बातें भी कही गयी थीं.

इसे भी पढ़ें :बकोरिया कांड : न्यूज विंग ने न्याय के लिए चलाया था अभियान, पढ़िये सभी खबरें एक साथ

कल्याण विभाग की तरफ से 2016 के अंत में किया गया था संस्थानों का चयन

कल्याण विभाग की तरफ से साल 2016 में एकलव्य विद्यालय, आश्रम विद्यालय, अनुसूचित जनजाति आवासीय प्राथमिक विद्यालय, अनुसूचित जाति आवासीय प्राथमिक विद्यालय, पीटीजी आवासीय प्राथमिक विद्यालय के संचालन को लेकर आवेदन मंगाये गये थे. इसके लिए अहर्ता और नियम भारी-भरकम तय की गयी थी. विभाग की तरफ से कहा गया था कि एकलव्य और आश्रम विद्यालय को चलानेवाली संस्था के लिए तीन साल तक सीबीएसइ, आइसीएसइ, झारखंड अधिविद्य परिषद, झारखंड सरकार के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के तय नियमों के तहत स्कूल चलाने का अनुभव जरूरी है. एकलव्य विद्यालय के लिए संस्थान का टर्न ओवर एक करोड़ रुपये से अधिक का होना जरूरी किया गया था. जबकि आवासीय विद्यालय के संचालन के लिए यह राशि 25 लाख रुपये और दो वर्ष तक स्कूल चलाने का अनिवार्य किया गया था. संस्थानों को आवेदन के साथ-साथ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, राज्य के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग की तरफ से तय शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मियों का वेतनमान, तय शैक्षणिक योग्यता और वर्गवार शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मियों की सूची भी उपलब्ध कराने को कहा गया था.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Comments are closed.

%d bloggers like this: