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 द रेज विदीन: वेयर इज अंबेदकर्स इथोस… में सूरज येंग्दे ने कहा,  आज भी दलित सिर्फ वोट बैंक

इस देश में दलित सिर्फ वोट बैंक बनकर रह गये हैं. आजादी के 70 साल बाद भी देश के नीति निर्धारण में दलितों को जगह नहीं मिल रही है. यह विचार अंबेडकरवादी सूरज येंग्दे ने व़्यक्त किये.

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Visakhapatnam :  इस देश में दलित सिर्फ वोट बैंक बनकर रह गये हैं. आजादी के 70 साल बाद भी देश के नीति निर्धारण में दलितों को जगह नहीं मिल रही है. यह विचार अंबेडकरवादी सूरज येंग्दे ने व़्यक्त किये. बता दें कि येंग्दे हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने वाले पहले दलित हैं. वे शुक्रवार को इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ-2018 के तीसरे संस्करण के अहम सत्र द रेज विदीन: वेयर इज अंबेदकर्स इथोस..? में यहां शामिल होने पहुंचे थे. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ-2018 के तीसरे संस्करण का आगाज शुक्रवार को विशाखापट्टनम में हुआ. द रेज विदीन: वेयर इज अंबेदकर्स इथोस..? सत्र में सूरज येंग्दे के साथ कांग्रेस नेता पल्लम राजू और भाजपा नेता कृष्ण सागर राव ने हिस्सा लिया. इस सत्र का संचालन इंडिया टुडे के मैनेजिंग एडिटर राहुल कंवल ने किया. इस क्रम में सूरज येंग्दे ने कहा कि देश की आजादी के 70 साल गुजर चुके हैं, लेकिन अब भी नीति निर्धारण में दलित को जगह नहीं मिल रही है. कहा कि इसकी शुरुआत आजादी के समय से ही हो गयी थी.

पहली कैबिनेट में भी किसी दलित को जगह नहीं मिली थी

सूरज येंग्दे ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद बनी पहली कैबिनेट में भी किसी दलित को जगह नहीं मिली थी. राजनेता दलितों के साथ इंसानों की तरह बर्ताव नहीं करते. इसी कारण आज तक दलित इस देश में सिर्फ वोट बैंक बनकर रह गये हैं. कार्यक्रम में पल्लम राजू ने कहा कि कई जगह अब भी दलितों पर अत्याचार होता है. हालांकि पहले की अपेक्षा वर्तमान में दलितों की स्थिति में काफी सुधार हुआ है. आज दलित इतने पीछे नहीं है, जितने पहले थे. हालांकि सूरज येंग्दे का कहना है कि बीते दशकों में राजनीतिक पार्टियों ने दलित एलीट तैयार किया है, जो उनके हित की बात करता है. वहीं, ज्यादातर दलित अब भी उत्पीड़न के शिकार हैं.  कार्यक्रम में पहले दिन अभिनेत्री अदिति राव हैदरी और तमिल फिल्म मेकर व डायरेक्टर पीए रंजीथ भी शामिल हुए. अब 22 दिसंबर को आज कॉन्क्लेव के आखिरी दिन आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू मंच पर मौजूद रहेंगे.

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