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अभी सवाल करना मना है!

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Dr Mahfooz Alam

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प्रतिदिन की तरह मॉर्निंग वॉक के बाद चाय लेने मैं जुम्मन के ढाबे में आ गया. जुम्मन और उसका स्टाफ बर्तनों की सफाई पर तैनात थे. मिट्टी के चूल्हे से कच्चे कोयले का सफेद धुआं वातावरण को दूषित कर रहा था. इसी बीच बाबू भाई बगल में अखबार दबाये और मुंह में पान की गिलौरी की जुगाली करते हुए आ धमके.   औपचारिक गुफ्तगू के बाद वह पास वाली प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठ गये. बगल में दबा ताजा खबर अखबार जमीन पर फडफडाने लगा. उन्होंने तेजी से अखबार उठाया और मुझसे सवाल करने लगे

“आजकल देश में क्या चल रहा है कि एक आतंकवादी को भी लोकसभा का टिकट दे दिया गया?  ऐसा क्यों किया गया?”

” बाबू भाई सवाल करना मना है,  आप उसे आतंकवादी नहीं कहें बल्कि आतंकवाद का आरोपी कहें. अभी तो उसके विरुद्ध मुकदमा चल रहा है और वह जमानत पर रिहा हैं”  मैंने जवाब दिया.

इतना सुनते ही बाबू भाई फट पड़े.

“आप भी सियासी लोगों की तरह बातें करते हैं,  सबके लिए कानून तो एक है, आपको याद होगा कि बम्बई  बम धमाके में तो इसी तरह एक महिला की गाड़ी का इस्तेमाल किया गया था,  यह बात उसकी जानकारी में भी नहीं थी, वह गिरफ्तार हुई और काफी बीमार होने के बावजूद उसे जमानत नहीं मिली, तो इसे भी आतंकवादी कहा जायेगा ना?”

” बाबू भाई हमारी संस्कृति में साधु-संतों के लिए इस तरह के शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाता है, यह लोग भगवान के बहुत करीब माने जाते हैं, अगर श्राप लग गया तो आप कहीं के न रहेंगे.”

“तो आप हमको श्राप से डरा रहे हैं? पड़ोसी देश में एक मौलाना हैं,  दुनिया उसे भी तो आतंकवादी कह रही है, जो जैसा रहेगा वैसा ही कहा जायेगा ना.”

“बाबू  भाई, आप भी बात समझते नहीं हैं, वह मौलाना हैं और यह साधु-संत, फर्क है ना.”

“हा हा हा हा” बाबू भाई ने जोर का ठहाका लगाया, फिर बोले,

” जुम्मन के मोहल्ले का सलीम मिस्त्री का बेटा मुस्लिम आतंकवाद के आरोप में गिरफ्तार हुआ था, गिरफ्तार होते ही टीवी के अधिकांश चैनल और अखबार ने बताया था कि एक खतरनाक आतंकवादी गिरफ्तार हुआ है, पुलिस ने मुस्लिम के चेहरे पर काला कपड़ा डाल कर मिडिया के सामने पेश भी किया था. बाद में मालूम हुआ कि जिस होटल में बम धमाका हुआ था, वहां मुस्लिम राजमिस्त्री का काम कर रहा था. पतला-दुबला कमजोर सा 25 साल का युवा था. आज सात साल बीत गये हैं, अब तक बेचारा रिहा नहीं हुआ है. उसकी पत्नी कैंसर जैसे खतरनाक रोग से पीड़ित है और छोटे-छोटे बच्चों को दो रोटी के लाले पड़े हुए हैं.”

“मगर जब तक न्यायालय उसे निर्दोष साबित नहीं करती है, उस समय तक तो वह आरोपी ही है.”

मैंने बाबू भाई को समझाया.

“हां, ठीक है न्यायालय  का सम्मान सिर-आंखों पर. मगर जो लोग ट्रेन, बस और सड़कों पर मासूम लोगों का खून बहा रहे हैं, उन्हें भी तो सजा मिलनी चाहिए.”

” हां, जरूर मिलेगी, धैर्य रखें और इंतजार करें” मैंने बाबू भाई में सकारात्मक सोच जगाई. “कौन जीता है तेरी जुल्फ के सर होने तक” बाबू भाई बुदबुदाए, फिर बोले,

” आजकल मेरे दिमाग में बहुत सारे सवाल घूम रहे हैं, कोई कह रहा है कि मरने के बाद कब्र चाहिए तो यह कहना होगा, कोई कह रहा है कि उससे काम कराना है तो उसे वोट देना होगा और इसी तरह की धमकी दी  जा रही है, क्या यही है प्रजातंत्र है?”

” बाबू भाई चुप रहें तो आपके लिए अच्छा है,  अधिक सवाल करेंगे तो आप भी मुसीबत में फंस सकते हैं. लीजिये गरम-गरम चाय पियें और ठंडे रहें.” मैंने बाबू भाई से कहा.

इसी बीच एक सफेद चमचमाती कार सामने आकर रुकी. कार के ऊपर सूरजमुखी वाला चुनावी झंडा लहरा रहा था. कार से एक गोरा-सा थुलथुल बदन वाला आदमी उतरा. उसे देखते ही बाबू भाई खड़े हो गये. उसने गर्मजोशी से बाबू भाई से हाथ मिलाया और पूछा कि वह जिस काम से नेता जी से मिलने गये थे, वह हुआ या नहीं. बाबू भाई ने ” न” में जवाब दिया. उसने कहा कि इलेक्शन चल रहा है, जीतने के बाद उनका काम हो जायेगा. वह आदमी बाबू भाई के कंधे पर हाथ रखते हुए उन्हें अपने साथ गाड़ी में ले गया.

मैंने बाबू भाई को आवाज लगायी,

“कहां जा रहे हैं?”

बाबू भाई ने जवाब दिया

“अभी सवाल करना मना है”

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