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चुनावी एजेंडा में आदिवासियों की समस्या और वनाधिकार कानूनों को करें शामिल : मंच

झारखंड वनाधिकार मंच ने जारी किया चुनावी मेनीफेस्टो, राजनीति दलों से की गयी मांग

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Ranchi : झारखंड वन अधिकार मंच की ओर से शुक्रवार को चुनावी मेनीफेस्टो जारी किया गया. जिसमें मुख्यत: वनाधिकार से संबधित एजेंडों को चुनावी एजेंडा बनाने की मांग की गयी. मंच के संयोजक मंडली के सदस्य सुधीर पाल ने कहा कि चुनावी समय में जरूरी है कि राजनीतिक दल ऐसे मुद्दों को अपने एजेंडों में शामिल करें, जो जनता से जुड़े हैं. न सिर्फ चुनाव जीतने के लिए बल्कि चुनाव जीत जाने के बाद भी इन मुद्दों पर काम होना चाहिए. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में लगातार वनों और वन पर निर्भर रहने वाले लोगों का दमन हुआ है. विशेषकर आदिवासियों का दमन हुआ है. इसके साथ ही भूमि से जुड़े विभिन्न मुद्दे राज्य के लिए काफी जरूरी है. उन्होंने कहा कि राज्य गठन को यूं तो 18 साल हो गये, लेकिन अब तक कई महत्वपूर्ण कानूनों का राज्य में सख्ती से पालन नहीं हो पाया है.

रिव्हयू पीटिशन एससी में दिया जायेगा

संयोजक मंडली के सदस्य फादर जॉर्ज मोनोपल्ली ने कहा कि, 13 फरवरी का सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर ऐतिहासिक अन्याय है. मंच की ओर से तैयारी हो रही है कि इस संबध में सुप्रीम कोर्ट में रिव्हयू पीटिशन दिया जाये. ताकि सुप्रीम कोर्ट अपने आदेश पर समीक्षा कर सके. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश एक पक्षीय आदेश है.

राजनीतिक दलों ने कहा वायदा नहीं, करना भी होगा

कार्यक्रम में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे. इस दौरान जेएमएम के पार्टी महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि, इन एजेडों को पार्टियां अपने चुनावी घोषणाओं में शामिल तो कर लेगी, लेकिन जरूरी है कि जीत के बाद काम भी किया जाये. उन्होंने कहा कि आदिवासियों के हित और वन संरक्षण को लेकर जितने कानून बनाये गये हैं. उनका राज्य में कहीं भी सही से अनुपालन नहीं होता. पिछले कुछ सालों में स्थिति तो और भी बदतर हो गयी है. सुप्रीम कोर्ट का आदेश ऐसे में और भी दुभाग्‍यपूर्ण है. मौके पर कांग्रेस से अजयनाथ शाहदेव, राजद से मनोज यादव, आप से राजन कुमार, सीपीआइएम से गोपीकांत बख्शी, भाकपा से भुवनेश्वर केवट उपस्थित थे.

इन मुद्दों को एजेंडा बनाया मंच ने

वनाधिकार कानून 2006 के लिए सकारात्मक महौल बनाने में राजनीतिक दल भूमिका निभायें, पांचवीं अनुसूची के तहत राज्यपाल की भूमिका सुनिश्चि करें, ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल को अधिक सशक्त बनायें, सीएनटी-एसपीटी के तहत ग्राम सभा को अधिकार दिए जाये, भूमि अधिग्रहण कानून 2013 को राज्य में लागू करें, लैंड बैंक जैसी अवधारणा को बंद किया जाये. गैरमजुरूआ जमीनों की रसीद काटी जाये समेत अन्य मेनीफेस्टो जारी किया गया.

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